अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय लेगा रोहिंग्याओं की सुध

हेग। म्यामांर से रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन के मुद्देे पर अगले महीने अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में सुनवाई होगी। युद्ध अपराध न्यायाधीश इस मसले पर वार्ता के लिए तैयार हो गए हैं। इस वार्ता के बाद न्यायाधीश तय करेंगे कि म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों के जबरन पलायन में जांच शुरू करने की अनुमति देना है या नहीं। न्यायमूर्ति पीटर कोवाक्स ने कहा कि 20 जून को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आइसीसी) में सुनवाई के दौरान तीनों न्यायाधीशों के सामने मुख्य अभियोजक फतौ बेंसौदा भी उपस्थित रहेंगे।


सात लाख रोहिंग्याओं ने छोड़ा अपना घर
म्यांमार के रखाइन प्रांत में अगस्त में हुई हिंसा के बाद अब तक करीब 7 लाख रोहिंग्या मुसलमान अपना घर छोड़ बांग्लादेश भाग चुके हैं, ताकि सैन्य कार्रवाई से बच सकें। दरअसल, रोहिंग्या मुसलमानों का ये पलायन म्यांमार की सेना की क्रूरतापूर्ण कार्रवाई के बाद हुआ था। हिंसा के जख्म आज भी रोहिंग्या मुस्लिम अपने दिलो-दिमाग से नहीं निकाल पाए हैं। हालांकि सेना का कहना था कि रोहिंग्या चरमपंथियों ने पुलिस चौकियों पर हमला किया था जिसके बाद उन्होंने कार्रवाई की
गैंबियन वकील फैटौ बोम बेंसौदा ने युद्ध अपराध न्यायालय के समक्ष कहा था कि क्या वह मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में निर्वासन की जांच कर सकती है। इस बीच कोवाक्स ने आदेश दिया, ‘केवल अभियोजक की उपस्थिति में चैंबर 20 जून, 2018 को क्लोज्ड सेशन में स्टेटस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा।Ó उन्होंने एक गोपनीय अनुबंध के साथ आदेश दिया जिसमें कहा कि उन मुद्दों को शामिल किया गया है जो जून की सुनवाई में बेंसौदा को संबोधित करना चाहिए।
गौरतलब हैं कि द हेग में 2002 में स्थापित आइसीसी एक स्थायी न्यायाधिकरण है, जिसमें जनसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराधों जैसे मसलों पर अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है।
Read Also:

औरंगाबाद दंगे :दंगाइयों का साथ देते कैमरे में कैद हुए 10 पुलिसवाले

पहले शतक के साथ ऋषभ पंत ने आईपीएल में पूरे किए 1000 रन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...