अब आंदोलन की बयार पहले जैसी नहीं रही…।

जयपुर । गुर्जर आरक्षण को लेकर मंगलवार को बयाना क्षेत्र में बुलाई गई महापंचायत के दौरान चली 20 मिनट की आंधी के बीच आंदोलन का तंबू उखड़ता नजर आया। वर्तमान स्थिति को भांपते हुए कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 23 मई को फिर महापंचायत होने और सभी के सामने आंदोलन पर फैसला करने की बात तो कही है, लेकिन मन में वे भी जानते  हैं कि अब समय पहले वाला नहीं है। समाज को आरक्षण दिलाने की बात कहते हुए वे लोगों का भरोसा हासिल करने में जुटे हैं, लेकिन कल  दूसरे धड़े की ओर से भी बुलाई गई महापंचायत के बाद कर्नल चिंतित हो उठे हैं।

पांच फीसदी गुर्जर आरक्षण के मुद्दे को लेकर गुर्जर समाज सही मायने में पांच बार आंदोलन कर चुका है। आरक्षण के इस आंदोलन के दौरान समाज के 72 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी आरक्षण कानूनी पेचेदिगियों में उलझा पड़ा है। इस आंदोलन की शुरूआत हुई 2006 से, तब से लेकर तीन बार बयाना के पीलूपुरा, एक बार पाटौली तथा एक बार हिण्डोन में आंदोलन हो चुका है। अब 6वीं बार आंदोलन की राख को फूंक मारकर आग जलाने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन इस बार माहौल 2007 और 2008 वाला नजर नहीं आ रहा है। इस बार आंदोलन की बयार समाज को दो धड़ों में बांटती नजर आ रही है। कल के घटनाक्रम को देखें तो साफ पता चलता है कि आंदोलन से ज्यादा नेतृत्व क्षमता को लेकर बेकरारी दिखाई दे रही है। कर्नल बैंसला की ओर से बुलाई गई महापंचायत में जुटे लोगों के सामने बोलने वाले अधिकांश वक्ताओं ने लम्बे-चौड़े भाषण तो खूब दिए, लेकिन आरक्षण की वर्तमान मांग ओबीसी कोटे में विभाजन को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दी। वहीं, पंचायत में चुपचाप सभी के भाषण को सुनने के दौरान कर्नल बैंसला वर्तमान स्थिति को भांप चुके थे, तभी उन्होंने साफ कहा कि अब पहले जैसी एकता और 2008 का माहौल नहीं हैं। हालांकि इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि उन पर  भरोसा रखें, वे आरक्षण यहीं लाकर देंगे।


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