अब फुल कोर्ट बुलाने के लिए दो जजों ने लिखी चिट्ठी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मसले कम होते नहीं दिख रहे. अब दो वरिष्ठ जजों जस्टिस रंजन गोगोई और मदन लोकुर ने सीजेआई को लेटर लिखकर कहा है कि सर्वोच्च अदालत के ‘भविष्य’ और ‘संस्थागत मसलों’ पर चर्चा करने के लिए ‘फुल कोर्ट’  बुलाई जाए। दो दिन पहले ही सात विपक्षी दल सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए थे, जिसे राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया।
सीजेआई दीपक मिश्रा को रविवार को मिले दो वाक्यों के संक्षिप्त लेटर में दोनों जजों ने उक्त मसलों पर विचार के लिए फुल कोर्ट बुलाने की मांग की है। जस्टिस गोगोई और लोकुर जजों को चुनने वाली कॉलेजियम के भी सदस्य हैं। गौरतलब है कि जस्टिस दीपक मिश्रा अक्टूबर में रिटायर हो रहे हैं और इसके बाद इस पद पर जस्टिस गोगोई के ही आने की संभावना है।
इस लेटर पर सीजेआई ने कोई जवाब दिया है. सूत्रों के अनुसार, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सभी जज पारंपरिक तौर पर होने वाली चाय पर मीटिंग में सीजेआई मिश्रा के साथ थे, लेकिन इसमें उन्होंने कोई आश्वासन नहीं दिया।
फुल कोर्ट बुलाने का मतलब:
सुप्रीम कोर्ट के फुल कोर्ट का मतलब है सभी जजों की एक बैठक बुलाना. ऐसी बैठक आमतौर पर सीजेआई द्वारा तब बुलाई जाती है जब न्यायपालिका से जुड़े जन महत्व के किसी बेहद जरूरी विषय पर चर्चा करनी हो।
गौरतलब है कि इसके पहले कॉलेजियम के दो और वरिष्ठ सदस्यों ने लेटर लिखकर सीजेआई से कहा था कि सरकार द्वारा न्यायपालिका में हस्तक्षेप को रोकने के लिए सभी जजों की मदद ली जाए। इस साल की शुरुआत में ही 12 जनवरी को देश में पहली बार न्यायपालिका में असाधारण स्थिति देखी गई। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया। चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी।

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