अब राजस्थान में सड़कों पर बीटेक, एमटेक, होल्डर झाड़ू लगाते आएंगे नजर

प्रदेश में पहली बार एक ऐसी भर्ती हो रही है जिसके आवेदनकर्ता अंगूठा छाप से लेकर इंजिनियर, डॉक्टर, सब हैं। जी हां, सफाईकर्मी की भर्ती के लिए आवेदनकर्ताओं की योग्यता देखने के बाद बेरोजगारी के आलम का अंदाजा लगाया जा सकता है। बी.टेक., एम.टेक, पॉलिटेक्निक की ड्रिग्री लेकर सफाई कर्मी के लिए आवेदन कर रहे हैं।
वहीं आवेदन करने के लिए आए युवकों का कहना है कि सरकारी नौकरी आज के समय में चुनौतीपुर्ण बन गई है।
इसलिए किसी भी तरह से सरकारी नौकरी मिल जाए फिर योग्यता के आधार पर दूसरी नौकरी भी मिल सकती है।
वहीं कुछ युवाओं का कहना है कि सरकार कोई नौकरी ही नहीं निकाल रही है ऐसे में जो नौकरी निकल रही है वहीं मिल जाए।

राजस्थान सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वो नई भर्तियां नहीं निकाल रही है।

वहीं सरकार दावा करती है कि उसने बहुत सारी भर्तियां निकाली हैं। दोनों में कौन सच बोल रहा है यह सफाई कर्मी के आवेदन करने वालों की लिस्ट देखकर साफ जाहिर होता है।

अलवर की बात करें तो शहर में करीब 3 से साढ़े तीन हजार आवेदन सफाईकर्मी भर्ती के सामान्य जाति के आवेदक हैं,

वहीं कोटा निगम आयुक्त डा. विक्रम जिंदल ने सोमवार को 800 सफाई कर्मचारियों को सेक्टर आवंटित कर दिए हैं। सेक्टर कार्यालयों में अपनी ज्वाइनिंग देने के निर्देश दिए गए हैं।

इन सफाई कर्मचारियों में एक वैद्य भी शामिल है। इसके अलावा कुछ सफाई कर्मचारी स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारक भी है।
खैर अगर सरकार की ओर से बेरोजगारी को कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब आपको प्रदेश में हर उस काम को इंजिनियर, डॉक्टर, प्रोफेसर करते दिखेंगे, जिसे अभी के समय में अंगूठाछाप करते हैं।

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