अमेरिकी ‘धमकी’ बेअसर, S-400 पर भारत-रूस में समझौता

0
55
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडो रूस संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता ने भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है. उन्होंने कहा कि रूस के साथ अपने संबंधों को भारत सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. तेजी से बदलते इस विश्व में भारत और रूस के संबंध और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
लेकिन राष्ट्रपति पुतिन का ये भारत दौरे क्यों इतना अहम था और एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम क्या है. इसके अतिरिक्त इस दौरे में क्या कुछ खास रहा और पूरी दुनिया की निगाह इस पर क्यों टिकी थी ये जानना बेहद जरूरी है।

[क्या है एस-400एयर डिफेंस सिस्टम]
रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम मौजूदा दौर का सबसे अच्छा मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जा रहा है. अमेरिका समेत नाटो देश इसे बेहद खतरनाक मानते हैं. जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस इस एयर डिफेंस सिस्टम को नाटो देशों ने SA-21 ग्रोलर नाम दिया है. रूस के अल्माज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो की ओर से विकसित यह मिसाइल सिस्टम S-300 सीरीज का एडवांस वर्जन है।

1990 के दशक में विकसित इस मिसाइल सिस्टम को रूस ने पहली बार इसका इस्तेमाल 2007 में किया था. नाटो देश इसे अमेरिका के THAAD यानी Terminal High Altitude Area Defense सिस्टम से अच्छा मानते हैं. हालांकि दोनों की हथियार प्रणाली अलग-अलग है. कहा जाता है कि रूस ने हाल में इसे सीरिया में भी इस्तेमाल किया है।

S-400 मिसाइल सिस्टम एक साथ कई काम कर सकता है. मसलन, इसमें मल्टीफंक्शनल रडार हैं जो खुद ब खुद टारगेट ढूंढ़ कर उन पर मिसाइल अटैक करने की क्षमता रखते हैं. एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, लांचर, कमांड और कंट्रोल सिस्टम से ये लैस है. इससे चार तरह की मिसाइलें दागी जा सकती हैं और अगर सेल्फ डिफेंस की बात करें तो दुश्मन को भांप कर  सुरक्षा के एक के बाद एक कई लेयर्स बना सकता है।

सलमान खुर्शीद ने जी प्रतिक्रिया
संप्रग सरकार में पूर्व विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने कहा कि, रूस के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं. सरकार के इस फैसले का स्वागत करना चाहिए. उन्होंने अमेरिका के हस्तक्षेप के मामले पर कहा कि भारत अपने हिसाब से निर्णय लेगा. हम अमेरिका की लकीर पर सीधे नहीं चल सकते हैं. भारत अपनी स्वतंत्र सोच को कभी गिरवी नहीं रख सकता है. भारत अपने स्वतंत्र सोच बनाए रखे, यह सरकार का दायित्व है. अगर सरकार इसे बनाए रखने में नाकाम होती है तो हम सवाल पूछेंगे।
[एक साथ कर सकता है सुपर फाइटर का मुकाबला]

इसके अतिरिक्त, 400 किलोमीटर के रेंज में यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर हर तरह के एयरक्राफ्ट, बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलों और यूएवी यानी मानवरहित विमान का सामना कर सकता है. एक साथ 100 हवाई टारगेट पर निशाना साध सकता है. यह मिसाइल सिस्टम अमेरिकी एफ-35 जैसे सुपर फाइटर लड़ाकू विमानों का भी सामना कर सकता है. जानकार कहते हैं कि S-400 एक साथ 6 एफ-35 सुपर फाइटर का मुकाबला सकता है.

भारत के पास इस वक्त आकाश और बराक-8 मिसाइल डिफेंस सिस्टम है. इसके अलावा भारत खुद का मल्टीलेयर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है जिसके तहत कम और ज्यादा ऊंचाई वाले टारगेट को खत्म किया जा सकेगा. भारत एडवांस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम के नाम से दो और मिसाइल विकिसत कर रहा है. लेकिन भारत को क्षमता के लिहाज से एस-400 की जरूरत है. क्योंकि बराक की रेंज 100 किलोमीटर तक की है और सिस्टम बैलेस्टिक मिसाइल वाली है यानी अगर भारत पर क्रूज मिसाइलों से हमला होता है तो यह सिस्टम कारगर साबित नहीं होगा।

इसके अलावा ये सभी भारतीय सिस्टम अभी पूरी तरह तैयार नहीं है इसलिए इसे भारतीय सेना में शामिल किया गया है ताकि तत्काल प्रभाव में लाया जा सके. इनके फंशनल होने में वक़्त है. जबकि S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से हर मोर्चे पर तैनात होने के लिए तैयार है. पांच मिनट के अंदर दुश्मन को शिकस्त देने के लिए इसे तैनात के जा सकता है और 17 हजार प्रति किलोमीटर की रफ्तार से एक साथ 80 से 100 टारगेट पर निशाना साध सकता है. लॉजिस्टिक के लिहाज से ये बेहद आसान है बड़ी आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

[इन क्षेत्रों में भी कारगार]

इसके साथ ही, 400 किलोमीटर के रेंज में यह स्ट्रेटजिक बॉम्बर, इलेक्ट्रोनिक वायफेयर प्लेन, बैलिस्टिक मिसाइल, स्ट्रेटजिक क्रूज मिसाइल, ड्रोन और छिपे हुए विमानों का सामना करने में सक्षम है. यह न्यूक्लियर मिसाइलों को भी रोकने में कारगर है. इसीलिए भारत एस-400 को हर हाल में हासिल करना चाहता है।

भारत की सबसे बड़ी चुनौती इस वक्त पाकिस्तान और चीन है. भारत को अगर एक साथ चीन और पाकिस्तान से लड़ना पड़े तो S-400 बड़े काम का साबित हो सकता है.  भारत इस डिफेंस सिस्टम को हासिल करने में इसलिए जल्दबाजी दिखा रहा है क्योंकि चीन भी रूस से इस सिस्टम के लिए करार कर चुका है और इस साल जनवरी से चीन  को इसकी डिलीवरी शुरू हो चुकी है।

[5 अरब डॉलर का है सौदा]
अक्टूबर, 2015 में डिफेंस एविएशन काउंसिल ने 12 यूनिटें खरीदने का विचार किया था लेकिन अब 5 यूनिटें भारत की जरूरत के लिए पर्याप्त मानी जा रही हैं और ये सौदा 5 अरब डॉलर का है. भारत के अलावा तुर्की , सऊदी अरब और कतर ने भी इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रूस से बात कर कर रहे हैं।

[अमेरिका डाल रहा था बाधा]
अमेरिका इस सौदे में बाधा बन रहा था. अमेरिका ने रूस पर सेंक्शन लगाया हुआ है हालांकि भारत अमेरिका के सैंक्शन को तवज़्ज़ो नही दे रहा है और भारत रूस संयुक्त वार्ता से ये भी साफ हो गया है कि भारत अपने नए स्ट्रैटेजिक दोस्त अमेरिका और पुराने मित्र रूस के रिश्ते को अलग अलग नज़रिये से देखता है और इसे डिप्लोमैटिकाली निभाने में विश्वास रखता है।

यहीं नही भारत अपने इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी के साथ कोई समझौता नही करेगा. लेकिन अमेरिका के इतिहास को देखे तो वो हर दोस्ती को सौदे की नज़र से देखता है. हालांकि अमेरिका के साथ 2+2 मीट के बाद भारत को ये उम्मीद है कि अमेरिका के प्रतिबंध से भारत को कुछ हद तक राहत जरूर मिलेगी.

दरअसल, अमेरिका ने CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act ) के तहत रूस के खिलाफ दंडात्मक प्रतिबंध लगा रखे हैं. CAATSA के तहत खास छूट का प्रावधान है. उम्मीद है कि अमेरिका एशिया में भारत से अपने खास स्ट्रेटजिक रिश्तों को देखते हुए उसे S-400 सौदे में प्रतिबंध के दायरे से बाहर कर देगा. पिछले महीने भारत के साथ अमेरिका की 2+2 बातचीत में भारत ने यह मामला उठाया था. कहा जा रहा है कि भारत ने चीन और पाकिस्तान को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

सूत्र बताते है अमेरिका ने भारत को संकेत भी दिए हैं कि वह इस सौदे के लिए भारत के खिलाफ कदम नहीं उठाएगा लेकिन अभी तक समझौते के संबंध में बातचीत नहीं हुई है. अमेरिका, चीन से मुकाबले के लिए भारत को उसके सामने खड़ा करना चाहता है. लेकिन S-400 सौदे में रूस का पेंच फंसा है. अमेरिका यूक्रेन में सैनिक हस्तक्षेप और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित तौर पर दखलअंदाजी के लिए रूस की लगभग सभी डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है. जिसमें S-400 का प्रोडक्शन करने वाली कंपनी भी शामिल है. CAATSA के तहत जो भी इन रूसी कंपनियों से डील करेगा उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

  • 1
    Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...