‘अरविंद केजरीवाल अब तो कुर्सी छोड़ो, संयोजक पद पर दो टर्म से ज्यादा नहीं रह सकते’

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मुनीश रायजादा ने कहा, ‘सरकार में आने से पहले केजरीवाल दूसरी पार्टियों की हाई कमानशिप का जोरदार विरोध करते हुए पार्टी को व्यक्ति विशेष की बपौती कहा करते थे. अब अपनी पार्टी में भी वह वही सब कर रहे हैं. केजरीवाल पार्टी में खुद का एकाधिकार समझते हैं. पार्टी की कमान को वह खुद अपने पास ही रखना चाहते हैं।’
[विरोध करने वालों को निकाल दिया]
रायजादा ने आगे कहा, ‘पार्टी के जिस-जिस नेता ने उनके तानाशाही रवैये का विरोध किया. उन्हें पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.’  अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पर दो टर्म पूरे कर चुके हैं. 26 नवंबर 2012 को ‘आप’ अस्तित्व में आई थी।
[खुद लिखी मिर्ची कांड की पटकथा]
रायजादा ने कहा, ‘केजरीवाल भली-भांति जानते थे कि बीते 26 नवंबर को उनसे सबसे कठिन सवाल पूछा जाएगा. उन्हें संयोजक पद पर किसी और को बिठाने के लिए कहा जायेगा. इसीलिए उन्होंने सचिवालय में खुद के ऊपर मिर्ची पाउडर से हमले की पटकथा लिख डाली. बेहतर यही होगा पार्टी के संविधान का सम्मान करते हुए अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद यह पद किसी दूसरे योग्य व्यक्ति को सौंपकर अपनी साख बचा लें।’

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