अल्पसंख्यक छात्रों के लिए दो हॉस्टल हर जिले में बना रही है सरकार

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जयपुर। राजस्थान अल्पसंख्यक मामलात विभाग प्रदेश में अल्पसंख्यक तबके से ताल्लुक रखने वाले छात्रों को बेहतर तालीम मुहैया कराने के लिए हर जिले में बालक एवं बालिकाओं के लिए एक-एक माइनॉरिटी हॉस्टल खोलने जा रहा है. हालांकि महकमें की ओर से कई जिलों में ये हॉस्टल चलाये जा रहे हैं और कई जिलों में सामाजिक संस्थाओं के जरिए ये सुविधाएं दी जा रही है, लेकिन एनजीओ की मदद से चलाए जा रहे हॉस्टल्स का फीडबैक ठीक नहीं आने के बाद विभाग कोशिश कर रही है कि प्रत्येक जिले में एक-एक सरकारी हॉस्टल बना दिया जाए.

प्रदेश में साल 2012-13 में राजस्थान में पांच अल्पसंख्यकों के लिए हॉस्टल बनाए गए थे, जिनमें करीब 180 बच्चों को मदद मिली थी. इसके बाद साल 2013-14 में 25 हॉस्टल खोल गए, जिनमें 1121 बच्चों को लाभ मिला. 2014-15 में इस छात्रावासों की संख्या घटकर 14 हो गई, जिनसे मात्र 673 बच्चे ही लाभ उठा पाये. साल 2015-16 में इन छात्रावासों की संख्या 35 हो गई और करीब 1418 बच्चों को इनसे लाभ मिला.

इन 35 छात्रावासों में से सिर्फ एक छात्रावास सरकारी था, बाकि सभी हॉस्टल एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे थे. 2016-17 में 57 हॉस्टल चलाए गए, जिनमें 2401 बच्चों को मदद मिली.

इनमें से दो सरकारी और बाकि 55 एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे थे. 2017-18 में इनकी संख्या 62 हो गई, लेकिन इनमें छात्रा की संख्या एक तिहाई ही हर गई.

इन आंकड़ों को देखते हुए सरकार सभी जिलों में बालक एवं बालिकाओं के लिए हॉस्टल खोलने जा रही है.

राजस्थान में अल्पसंख्यकों को तालीम में आगे लाने की कोशिशें तेज की जा रही है. हायर एजुकेशन में एनरॉलमेंट बढ़े इसके लिए प्रदेश के अंधरूनी हिस्सों से बच्चों को शहरों की तरफ रुख करना पड़ रहा है.

ऐसे में जिन बच्चों के पास बुनियादी जरूरतें नहीं होती वे ड्रॉप हो जाते हैं. राज्य के हर जिले में एक गर्ल्स और बॉयज का सरकारी छात्रावास इन बच्चों को काफी मदद दे सकेगा.

कुछ जिलों में एमएसडीसी और दूसरी योजनाओं के तहत हॉस्टल बनकर लगभग तैयार है और कुछ जिलों में इन्हें बनाने के लिए महकमें और प्रपोजल भेज दिये हैं

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