आखिर क्यों विवादों में घिरती गई यूपी की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा

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परीक्षा नियामक के रिजल्ट के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद ने 31 अगस्त को चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की. लेकिन इस सूची में सिर्फ 34,660 अभ्यर्थियों का ही नाम था, जबकि 6127 अभ्यर्थियों को क्वालीफाई होने के बाद भी बाहर कर दिया गया. पता चला कि असल में रिजल्ट आने के बाद परिषद ने जिला आवंटन करते समय कुल 68,500 पदों की जगह 41,556 क्वालीफाई अभ्यर्थियों के आधार पर ही आरक्षण लागू कर दिया था. इसके चलते जनरल के 6127 अभ्यर्थी बाहर हो गए.

इसे लेकर मामले में विरोध शुरू हो गया. 1 सितम्बर को चयन से बाहर हुए अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. बेसिक शिक्षा निदेशालय पर दिन-रात बैठे अभ्यर्थियों को हटाने के लिए 2 सितम्बर को पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया. दबाव बढ़ा तो परिषद ने गलती सुधारते हुए 6127 अभ्यर्थियों की भी चयन सूची जारी कर दी.

फेल काे किया पास, पास को किया फेल

इसी बीच परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की पोल खुल गई. दरअसल कुछ अभ्यर्थियों की आंसर शीट कोर्ट में सामने आई. इसमें पता चला कि कैसे अभ्यर्थियों के रिजल्ट में हेर-फेर कर किसी के अंक घटकर डिसक्वालीफाई किया गया तो कैसे किसी को बिना परीक्षा दिए ही उत्तीर्ण कर दिया. मामला तूल पकड़ने पर शनिवार 8 सितम्बर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी को निलंबित कर जांच बैठाई गई. इसके अलावा रजिस्ट्रार परीक्षा और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद् को भी हटा दिया गया.

अब शुरू हुआ है जांचों का दौर

वहीं मामले की जांच के लिए प्रमुख सचिव, गन्ना की अध्यक्षता में एक हाईपॉवर 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. चौंकाने वाली बात ये रही कि जैसे ही इस कार्रवाई की खबरें आईं, इलाहाबाद में परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से घोटाले के सबूत मिटाने के लिए अभ्यर्थियों की कॉपियां जलाने का मामला सामने आ गया. इसका वीडियो भी वायरल हो गया. अब कॉपी जलाने की जांच के लिए एक 3 सदस्यीय टीम को इलाहबाद भेजा गया है.

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