आगामी परीक्षाओं को लेकर नहीं है कोई कार्यक्रम

जयपुर। वर्तमान सरकार प्रदेश के बेरोजगारों को 15 लाख नौकरियां देने का वायदा कर सत्ता में आई। साढ़े चार साल में बेरोजगारों को भाजपा सरकार के वायदे का कितना लाभ मिला।

यह तो खुद बेरोजगार भी अच्छे से जानते है। मगर अब सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है।

ऐसे में बेरोजगारों की आखिरी उम्मीद भी अब दम तोड़ती दिख रही है।

सरकार के कामकाज को अब 6 महीने से कम समय बाकी है।

वहीं राजस्थान लोकसेवा आयोग में महज एक परीक्षा की तिथि ही निर्धारित हुई है।

आयोग आरएएस प्री 2018 परीक्षा 5 अगस्त को करवाने जा रहा है।

आरएएस प्री परीक्षा भी निर्धारित समय पर हो जाए इस पर भी संशय बना हुआ है।

दरअसल आयोग में चेयरमैन का पद खाली है।

डेढ़ महीने से खाली पड़े पद को भरने में सरकार कोई गंभीरता नहीं दिखा रही है।

गंभीरता तो सरकार ने विभिन्न पदों की स्वीकृतियां निकालने में भी नहीं दिखाई।

यही वजह है कि 2016 के बाद आज तक आयोग परीक्षा का कैलेंडर तक नहीं बना पाया।

आयोग की वेबसाइट पर आगामी परीक्षाओं का ब्यौरा पढ़ें तो 2016 का परीक्षा कैलेंडर लगा हुआ है,

जिसमें कई पदों की परीक्षा हो चुकी है। बावजूद यह बेरोजगार अभ्यर्थियों को कंफ्यूज कर रहा है।

सरकार से बेरोजगारों को काफी उम्मीद थी मगर बेरोजगारों की उम्मीद आयोग के हाल भी सरकार की वजह से बेहाल ही है। बिना अध्यक्ष के आयोग चल रहा है।

वहीं आगामी परीक्षा को लेकर आयोग के पास कोई कार्यक्रम नहीं है।

ऐसे में सरकार के उस वादे का क्या होगा जो सत्ता में आने से पहले बेरोजगारों से किया था।

बेरोजगार हो रहे है परेशान

हाल ही में आयोग ने द्वितीय श्रेणी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन लिए। 9 जून आवेदन की अंतिम तिथि थी। प्रदेश के हजारों बेरोजगार आवेदन ऑनलाइन भरने से चूक गए क्यों कि 9 जून को सर्वर डाउन था।

कई अभ्यर्थियों के फार्म भर गए तो टोकन नहीं निकले। जिससे वो परीक्षा के लिए आवेदन से वंचित रह गए। आयोग कार्यालय में हर रोज सैकड़ों अभ्यर्थी

विभिन्न जिलों से आकर आयोग सचिव से मिलकर आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग कर रहे है। मगर बिना अध्यक्ष के आयोग भी अभ्यर्थियों की पीड़ा जानते हुए भी उन्हें राहत नहीं पहुंचा पा रहा हैं।

इतना ही नहीं अभ्यर्थी आयोग के सदस्यों से भी मिल चुके हैं।

लिहाजा किसी ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। आवेदन से वंचित रहे हजारों

अभ्यर्थी आयोग को उम्मीद भरी निगाह से देख रहे हैं,

लेकिन अभ्यर्थियों को सुनने वाले तो आयोग में हैं मगर निर्णय करने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा।

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