आतंकियों ने यौन गुलाम बना किया था शोषण, अब मिला नोबेल पुरस्कार

0
66

ओस्लो। जिन दो हस्तियों को वर्ष 2018 के शांति का नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है वह दुनिया में जारी हथियारबंद संघर्षों में यौन हिंसा के खिलाफ काम कर रहे हैं।

नोबेल समिति ने कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे और इराक की यजीदी महिला नादिया मुराद को संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला लिया है।

समिति की अध्यक्ष बेरिट रीस एंडरसन ने ओस्लो में पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, “दोनों को युद्ध के हथियार के रूप में यौन हिंसा का इस्तेमाल रोकने के प्रयास के लिए पुरस्कार देने का फैसला लिया गया है।”

एंडरसन ने कहा, “दुनिया में केवल तभी शांति का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है जब युद्ध में महिला, उसका मौलिक अधिकार एवं उसकी सुरक्षा मान्य हो और उसका संरक्षण किया जाए।” मुकवेगे और मुराद दोनों दुनिया के उस आतंक के खिलाफ संघर्ष के प्रतिनिधि के रूप में सामने आए हैं जो प्रसारित होते चले जा रहे मी टू मूवमेंट जैसे एकल आंदोलनों से कहीं आगे जाता है।

आईएस के चंगुल में थी नादिया

समिति ने 25 वर्षीय इराकी महिला नादिया मुराद को भी शांति का नोबेल पुरस्कार के लिए चुना है। वह यजीदी समुदाय से आती हैं। मलाला यूसुफजई के बाद उन्हें भी सबसे कम उम्र में यह पुरस्कार मिला है। वर्ष 2014 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकियों ने नादिया का अपहरण कर लिया था।

  • 1
    Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...