आनंदपाल एनकाउंटर में शामिल अफसरों को जान का खतरा

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जयपुर। गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर में शामिल पुलिस अफसरों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। अब इन अफसरों को सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए जान से मारने और देख लेने की धमकी मिल रही है। ऐसे में प्रशासन गंभीर हो गया है और एटीएस ने अफसरों की सुरक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखा है। बताया जा रहा है कि इस पत्र को पीएचक्यू से गृह विभाग भेजा गया है।

पत्र में कुछ पुलिस अफसरों के नाम लिखे गए हैं और उनकी ड्यूटी समय के साथ ही अन्य जानकारियां दी गई हैं, ताकि पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया करा सके। पुलिस अफसरों की एक टीम ने 24 जून 2017 को चूरू के मालासार गांव में आनंदपाल का एनकाउंटर किया था। उसके बाद बवाल और आगजनी हुई थी। बताया जा रहा है कि ये धमकियां जेल में बंद आनंदपाल के भाई और अन्य साथियों की ओर से दी जा रही हैं।

आनन्दपाल एनकाउंटर को लेकर खड़े हुए बखेड़े से एसओजी-एटीएस ने बड़ा सबक लिया है। अपराधी को पकडऩे के दौरान एनकाउंटर की नौबत आए तो उस दौरान के घटनाक्रम के साक्ष्य बहुत जरूरी हैं। इसके लिए अब तय किया गया है कि ऐसी टीमें अब मोबाइल फोन की बजाय वायरलैस काम में लेंगी, ताकि साक्ष्य रहे कि घटनाक्रम किस तरह चला।

वायरलेस से स्थानीय पुलिस से जुड़ी रहेगी एटीएस टीम
ऑपरेशन के दौरान अब टीम अपने लीडर से और स्थानीय पुलिस कन्ट्रोल रूम से वायरलेस सैट के जरिए जुड़ी रहेगी। स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम के जरिए जयपुर में एटीएस-एसओजी मुख्यालय के अधिकारी टीम के संपर्क में रहेंगे।

एसओजी-एटीएस के अधिकारियों को ये भी महसूस हुआ कि मोबाइल से संपर्क करने पर कई बार नेटवर्क की समस्या आती है। इससे ऑपरेशन में होने वाले विलम्ब का अपराधी को सीधा फायदा मिलता है। कुछ महीने पहले आदर्शनगर में विशाल चौधरी को घेरा तब ऐसी ही समस्या आई थी और वो बच निकला था। वायरलैस सैट होता तो नाकाबंदी कराकर उसे पकड़ा जा सकता था।

वायरलेस के जरिए कई सवालों के जवाब मिल जाते
उल्लेखनीय है कि आनन्दपाल एनकाउण्टर को लेकर राज्य में न सिर्फ सियासत गरमाई थी, बल्कि कई सवाल भी खड़े किए गए थे। कमांडो टीम ने बताया कि उस दौरान वायरलेस काम में लिया जाता तो कई सवालों के जवाब रिकॉर्ड पर मिल जाते। पूरी बातचीत मोबाइल फोन पर चलने के कारण एसओजी-एटीएस की टीम सीबीआई और अन्य एजेन्सियों को जवाब के साथ पुख्ता सबूत नहीं दे पाई।

हालांकि वायरलेस से सम्पर्क करने की स्थिति में सूचनाएं लीक होने की आशंका रहती हैं। ऐसे में एटीएस-एसओजी कुख्यात बदमाशों और आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान अब तक मोबाइल से मोबाइल पर ही सम्पर्क में रहती आई है, लेकिन अब बातचीत और अधिकारियों के निर्देश ऑन रिकॉर्ड रखने के लिए वायरलेस का उपयोग किया जाएगा।

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