आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में चिकित्सा अधिकारी समेत 7 को सज़ा

कोर्ट ने चिकित्सक द्वारा संचालित निजी अस्पताल को भी सीज कर राज्य सरकार को अधिग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। संभवत: पूरे देश में निजी अस्पताल को अधिग्रहण कर सरकार को देने का यह पहला मामला है। एसीबी कोर्ट कोटा के सहायक निदेशक अभियोजन एहसान अहमद ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि साल 2003 में जयपुर एसीबी ने तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी शर्मा के खिलाफ जांच की थी।

इस दौरान सामने आया था कि वर्ष 1982 से 98 तक डॉ. आरपी शर्मा ने पद का दुरुपयोग कर टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर फर्जी निवेश किया।
आरोपी ने इसमें अपनी पत्नी मोहिनी शर्मा, ससुर तेजकरण शर्मा, सांस चंद्रकांता शर्मा सहित गीतांजलि शर्मा, किशन गोपाल, असलम पठान को षड्यंत्र पूर्वक शामिल कर संपत्ति को अपने कब्जे में रखा। इस दौरान 55 लाख 42 हजार 429 रुपये की सम्पति अर्जित की।

वहीं, जांच में पाया गया कि इन्होंने 33 लाख से ज्यादा की आय अवैध रूप से अर्जित की, जिस पर एसीबी ने कोर्ट में चालान पेश किया।

आज मामले में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. आरपी शर्मा और उनकी पत्नी मोहिनी शर्मा को सात साल की सजा व 50-50 लाख का जुर्माना लगाया।

एहसान अहमद ने आगे बताया कि इस मामले में डॉ. आरपी शर्मा के ससुर तेजकरण शर्मा व सास चंद्रकांत शर्मा को तीन साल व 5-5 लाख जुर्माना और अन्य तीन आरोपियों को 5-5 साल की सजा व 5-5 लाख के जुर्माने से दंडित किया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने चिकित्सक द्वारा संचालित निजी अस्पताल को सीज कर राज्य सरकार को अधिग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।
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