इफ्तार पार्टी बहाना, विपक्षियों को है साथ लाना!

चंडीगढ़/नई दिल्ली। रमजान का पाक महीना चल रहा है और इफ्तार पार्टियों या यूं कहें कि सियासी इफ्तार पार्टियों का दौर भी लगातार जारी है तो गलत नहीं होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 13 जून को इफ्तार पार्टी देंगे। कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इफ्तार का आयोजन उस वक्त किया जा रहा है जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में होने वाली

इफ्तार का आयोजन नहीं करने का फैसला किया है।

उनका मानना है कि करदाताओं के पैसों से भवन में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं होगा।

माना जा रहा है कि राहुल की इफ्तार पार्टी में कांग्रेस के नेताओं के अलावा विपक्षी दलों के भी कई नेता शामिल होंगे।

इसे विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

कांग्रेस दो साल के अंतराल के बाद इफ्तार का आयोजन करने जा रही है।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष रहने के दौरान सोनिया गांधी ने 2015 में इफ्तार का आयोजन किया था।

11 साल बाद यह पहला मौका होगा जब राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं होगा। इससे

पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के कार्यकाल (2002-2007) में इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं होता था।

पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग को इफ्तार के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई है।
राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की ओर से पहली बार इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है।
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