उत्तर कोरिया के बंद परमाणु परीक्षण स्थल से पर्यावरण को खतरा

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षण स्थल पुंग्ये-री को खत्म कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा होने से यह पहले से भी अधिक खतरनाक हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में ऐसा करने से पर्यावरण पर भी संकट पैदा हो सकता है।
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग ने अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष नेता मून-जेई-इन के साथ पिछले माह हुई शिखर बैठक में यह घोषणा की थी। उस समय बैठक में किम जोंग ने ऐलान किया था कि वह अपने परमाणु परीक्षण स्थल के विद्यटन की निगरानी के लिए विशेषज्ञों और पत्रकारों को आमंत्रित करेगा।

छह परीक्षणों से पहाड़ हुआ जर्जर

शुरुआती तौर पर उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग की एक रियासत में बारे में बताया गया कि वर्ष 2006 से परमाणु स्थल पर किए गए छह परीक्षणों से माउण्ट मंताप को गहरी क्षति पहुंचाई। इन परीक्षणों से माउण्ट इतना कमजोर हो गया कि उस पर कोई और परीक्षण करना संभव नहीं था।
सैटेलाइट तस्वीरों में भी इस बात की पुष्टि हुई है। तस्वीरों के मुताबिक पहाड़ पर भूस्खलन का पता चलता है। चीनी भूगर्भिकों ने भी अपने अध्ययन में दावा किया कि सितम्बर 2017 के परमाणु परीक्षणों ने इस पर्वत को जर्जर कर दिया है।

चिंतित हैं विशेषज्ञ

कोरिया हेराल्ड का कहना है कि यह परमाणु स्थल आगे परीक्षण करने में असमर्थ है। इसलिए इस स्थल को खत्म करने के दो संभावित तरीकों का प्रस्ताव दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षण से पहाड़ों में बनी सुरंगों के प्रवेश द्वार को बंद करने के लिए विस्फोटकों का सहारा लेना पड़ेगा। लेकिन, दूसरी तरफ इस बात की भी चिंता है कि ऐसा करने से पहले से जर्जर पहाड़ों के आंतरिक रिक्त स्थान का पतन हो सकता है और ऐसा होने से रेडियोधर्मिता जारी हो सकती है। इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा। विशेषज्ञों का कहना है

कि इस पूरे परमाणु स्थल को नींबू और रेत के मिश्रण में दफनाना होगा। लेकिन, ऐसा करने से परमाणु स्थल को सील होने में काफी समय लगेगा और तब तक विशेषज्ञों को वहां पर रुकना भी पड़ेगा। हालांकि, परमाणु अपशिष्ट से निपटना पुराना और कठिन सवाल है।

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