एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते नहीं कर सकते विभागीय कार्रवाई: हाईकोर्ट

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न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश साल 1999 में पुलिस निरीक्षक महेश चंद्र शर्मा और महिला कॉन्स्टेबल की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए हैं.अदालत ने कहा है कि पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश के दो पत्नियां और इंद्र के पास कई अप्सराओं से संबंध की बातों के साथ ही भगवान कृष्ण के 16 हजार रानियों की बात कही गई है, लेकिन वर्तमान में संबंधों के नए परिपेक्ष्य भी सामने आ गए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि समाज की नैतिकता से संवैधानिक प्रावधान को नहीं बदला जा सकता है. इसके अलावा निजता के अधिकार को सरकार समाप्त नहीं कर सकती है.अपनी इच्छा से साथी चुनने का अधिकार को सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती है.अदालत ने कहा कि पति या पत्नी के जिंदा रहते दूसरे से संबंध बनाने की प्रशंसा नहीं की जा सकती, लेकिन इसके आधार पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती।
याचिका में कहा गया कि उन्हें अवैध संबंधों के आधार पर सेवा से निलंबित किया गया था. इसके अलावा विभाग ने दोनों के संबंधों से पैदा हुई संतान का डीएनए टेस्ट कराने के संबंध में आदेश जारी किए.महिला कॉन्स्टेबल को 8 सितंबर 1999 को जयपुर उत्तर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने डीएनए टेस्ट के लिए बुलाया था.सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को नियंत्रित करने का पूरा अधिकार है।
याचिकाकर्ता महेश शर्मा ने 1973 में एक अन्य महिला से विवाह कर लिया था, जबकि महिला कॉन्स्टेबल की ओर से कहा गया कि बच्चे का जन्म अवैध संबंधों का परिणाम नहीं है. इसके अलावा निजी मामले को लेकर निलंबन की कार्रवाई नहीं हो सकती.सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने निलंबन की कार्रवाई को रद्द करते हुए समस्त परिलाभ अदा करने को कहा है।

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