एक रानी और उतरेगी जनता के दरबार में, बीजेपी कांग्रेस में खलबली

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जयपुर। विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही जयपुर ग्रामीण विधानसभा सीटों पर चुनावी रणनीति की बिसात बिछने लगी है। इस बार भी पूर्व राजघराने कांग्रेस-भाजपा के समीकरण बिगाड़ने में लगे हुए हैं।

फिलहाल पूर्व रानी ने फिलहाल किसी भी दल का चयन नहीं किया है लेकिन इतना तय है कि महारानी किसी भी दल के लिए मजबूत प्रत्याशी होगी।

जयपुर राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी दीया कुमारी के बाद अब एक और नया चेहरा विराटनगर में दिखाई दे रहा है। नित बनते-बिगडते कयासों के बीच शाहपुरा राजपरिवार की सदस्य रानी रत्नाकुमारी की सक्रियता भी क्षेत्र में नजर आ रही है। उनकी ओऱ् से किए जा रहे सामाजिक कार्यों को देखते हुए उनके चुनाव में उतरने की संभावना नजर आ रही है। इससे कांग्रेस और भाजपा के खेमों में खलबली मची हुई है।

एक ओर कांग्रेस में राजपूत मतदाताओं के धुरवीकरण को लेकर पूर्व रानी का चयन बेहद कारगर साबित होगा वहीं भाजपा अपने खिसकते राजपूत वर्ग को पूर्व महारानी के चयन से मजबूत करने का प्रयास करेगी।

जानकारी के अनुसार पूर्व महारानी ने हवेलियों को छोड़ कर जनता के बीच सेवा करने का मानस बना लिया है। मंदिरों में पूजा, धार्मिक कार्यक्रमों और स्कूली छात्राओं के बीच उनकी उपस्थिति ने इलाके की जनता में उनके लिए एक खास जगह बना ली है। राजनीति में राजपरिवार

मौजूदा विधानसभा में भी शाही परिवारों के वंशजों का अच्छा-खासा रसूख है। इसमें सबसे प्रमुख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हैं, जो धौलपुर राजघराने की वंशज हैं।

बीकानेर रॉयल फैमिली की सिद्धि कुमारी, डीग राजपरिवार की कृष्णेंद्र कौर दीपा, जयपुर राजघराने की दिया कुमारी, शाहपुरा के राव राजेंद्र सिंह और खींवसर रियासत के गजेंद्र सिंह खींवसर लोकतंत्र में ‘शाही खून’ की नुमाइंदगी कर रहे हैं। शाहपुरा घराने की एक और रानी रत्नाकुमारी भी राजस्थान विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रयास कर रही है। पूर्व रानी से चुनाव लडकर जनता की सेवा करने की हो रही अपील

विराटनगर में विधानसभा चुनावों की आहट सुनाई दे रही है। भाजपा व कांग्रेस के संभावित दावेदार जहां जनसंपर्क में जुटे है वहीं पूर्व रानी रत्नाकुमारी जनसेवा में जुटी हुई है।

रानी रत्नाकुमारी को युवा, बुजुर्ग और महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनसे चुनाव लडकर क्षेत्र की जनता की सेवा करने की अपील कर रहा है। अभी तक पूर्व रानी ने किसी भी दल को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

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