एच-1बी वीजा होल्डर्स के जीवनसाथी अमेरिका में नौकरी नही कर सकेंगे

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वॉशिगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने चुनावी वादों को अमल करने में जुटे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘बाई अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ नीति पर काम कर रहे हैं। इसका मकसद अमेरिका के स्थानीय निवासियों को ज्यादा संख्या में नौकरी दिलाना है। इसके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार एच-1बी वीजा होल्डर के लिए नियम कड़े करने में जुटे हुए हैं। इसी दिशा में उन्होंने अब एक और कड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। ट्रंप सरकार एच1-बी वीजा होल्डर के स्पाउस (जीवनसाथी) के लिए अमेरिका में कानूनी तौर पर काम करने पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है।  इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ेगा।
ओबामा सरकार फैसला खत्म:
अमेरिका की संघीय एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने लॉमेकर्स को इसकी जानकारी दी है। दरअसल ट्रंप सरकार इस कड़े प्रावधान के जरिए ओबामा एरा के नियम को खत्म करना चाहती है। इस नये नियम का असर 70 हजार से ज्यादा एच-4 वीजा होल्डर पर पड़ सकता है। जिन्हें यहां वर्क परमिट हासिल हुआ है। एच1बी वीसाधारक ने अगर स्थायी निवासी यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया है तो उसके जीवनसाथी को वर्क परमिट के तौर पर एच-4 वीसा देने का प्रावधान है। ओबामा सरकार के समय 2015 में यह लागू हुआ था। ट्रंप प्रशासन इस प्रावधान को खत्म करने जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन को उस नियम को खत्म करने को कहा है जिसमें एच-1बी वीजा होल्डर्स की पत्नियों को अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति मिलती है।
71,287 एच-4 वीसा में से 93प्रतिशत भारतीयों को माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट की पिछले हफ्ते जारी स्टडी रिपोर्ट के अनुसार जून 2017 तक अमेरिका ने 71,287 एच1बी वीसाधारकों के पति/पत्नी को एच-4 वीसा दिया। इनमें से 93प्रतिशत भारतीयों को मिला।
अमेरिकी प्रशासन के समक्ष वीजा मुद्दे को उठाएंगे:प्रभु
केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने एच -1 बी वीजा नियमों को कड़ा करने के अमेरिकी सरकार के प्रस्ताव पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को ट्रंप प्रशासन के समक्ष उठाएंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री प्रभु ने कहा कि हम अमेरिकी प्रशासन के कुछ कदम से बहुत निराश हैं। एच -1 बी वीजा गैर – आव्रजक वीजा है। इसमें अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को वैसे क्षेत्र में नियुक्त करने की अनुमति होती है जहां सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत है। प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों की नियुक्ति पर निर्भर हैं। प्रभु ने कहा कि इस बात के साक्ष्य हैं कि भारतीयों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में वृद्धि में उल्लेखनीय योगदान दिया। इसके अलावा भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में निवेश किए जिससे नए रोजगार सृजित हुए। अगर भारतीय आईटी पेशेवरों के पति या पत्नी योग्य हैं, वे अर्थव्यवस्था में योगदान ही करेंगे न कि स्थानीय लोगों के रोजगार छीनेंगे।
क्या है एच 1 बी वीजा : यह एक तरह की तत्काल सेवा है। 15 दिन के भीतर 1225 डॉलर की फीस देकर अमरीका के लिए वीजा मिल जाता है। अमेरिका ने 3 अप्रैल के बाद इस तत्काल सेवा पर रोक लगा दी है। इस वीजा के तहत हर साल 85,000 पेशेवर को वीजा दिया जाता है। एक अनुमान के अनुसार इसका 75 प्रतिशत भारतीय लाभ उठा लेते हैं। अनुमान के अनुसार तीन लाख भारतीय एच 1 बी वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं।
 क्या है प्रीमियम प्रासेसिंग : प्रीमियम प्रोसेसिंग के जरिए एच-1बी वीजा एप्लीकेशंस को तेजी से आगे बढ़ाया जाता है। औसतन एच 1 बी वीजा को मंजूरी मिलने में 3 से 6 महीने का समय लगता है।हालांकि नियोक्ता कंपनियों की ओर से 1,225 डॉलर का प्रीमियम अदा करने पर यह वीजा 15 दिन में ही जारी कर दिया जाता है। अमेरिका ने इसी प्रीमियम प्रक्रिया को 6 महीने के लिए रोक दिया है।
 क्या है विरोध का कारण:अमेरिका में पिछले कई सालों से इस वीजा को लेकर लोग कड़ा विरोध करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि कंपनियां इस वीजा का गलत तरह से इस्तेमाल करती हैं। उनकी शिकायत है कि यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को जारी किया जाना चाहिए जो अमेरिका में मौजूद नहीं हैं, लेकिन कंपनियां इसका इस्तेमाल आम कर्मचारियों को रखने के लिए कर रही हैं। इन लोगों का आरोप है कि कंपनियां एच-1बी वीजा का इस्तेमाल कर अमेरिकियों की जगह कम सैलरी पर विदेशी कर्मचारियों को रख लेती हैं। पिछले कुछ सालों में इसे लेकर कई अदालती लड़ाइयां भी लड़ी जा चुकी हैं।

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