एजुकेशन सिस्टम को लेकर बनाई गई व्हाई चीट इंडिया मूवी

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जालौन. 18 जनवरी दिन शुक्रवार को रिलीज हुई व्हाई चीट इंडिया मूवी  ने यूपी के लोगों पर बहुत ही गहरा प्रभाव डाला है। व्हाई चीट इंडिया फिल्म  एजुकेशन स‍िस्टम में हो रहे घोटालों के आधार पर बनाई गई है।

एजुकेशन सिस्टम को लेकर बनाई गई मूवी

व्हाई चीट इंडिया फिल्म में घटनाओं को इस तरह से दिखाया गया है कि आप सभी लोग खुद को उन घटनाओं से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। इस फिल्म में कई ऐसी कई चीजें दिखाई गई हैं जो आपकी आंखें खोल देंगी। वहीं एजुकेशन सिस्टम की कहानी में रोमांस भी दिखाया गया है जो लोगों को थोड़ा खलता हुआ नजर आया लोकिन थोड़ी देर बाद ही व्हाई चीट इंडिया मूवी की कहानी फिर से अपने ट्रैक पर वापस आ जाती है।

जानिए एजुकेशन स‍िस्टम का कौन सा मुद्दा उठाया गया

व्हाई चीट इंड‍िया मूवी देखने वाले लोगों का कहना है कि इस फिल्म में एजुकेशन स‍िस्टम का वो मुद्दा उठाया गया है ज‍िस पर हम अक्सर ही खबरें अखबारों और इंटरनेट पर पढ़ते रहते हैं। कहानी के केन्द्र में है रॉकी भैया यानी राकेश सिंह (इमरान हाशमी)। वह इंटेलीजेंट बच्चों को पैसे द‍िलाकर अमीर बच्चों की जगह एंट्रेंस टेस्‍ट में बिठवाता है। इस तरह उसने अपना एक एंपायर खड़ा कर द‍िया है लेकिन उसकी जिंदगी तब बदल जाती है, जब उसका सामना एक इंटेलीजेंट मिडल क्लास स्टूडेंट सत्येंद्र दुबे यानी सत्तू और उसके पर‍िवार से होता है।

फ‍िल्म की एक खूबी ये है क‍ि इमरान हाशमी के क‍िरदार को कहीं से भी ये द‍िखाने की कोश‍िश नहीं की गई है क‍ि वो सही है या गरीबों की मदद कर रहा है। अगर वो गलत है तो उसे उसी तरीके से पर्दे पर उतारा गया है। कई जगह ऐसा भी हुआ क‍ि उसका प्लान फेल हो जाता था और वो पकड़ा भी जाता था। ऐसे में किरदार को असल जिंदगी जैसा ही रखा गया है

ये है व्हाई चीट इंड‍िया मूवी की पूरी कहानी

ये कहानी झांसी के रहने वाले राकेश शर्मा उर्फ रॉकी की है। उसे खुद को राकेश शर्मा “जी” कहलाना बहुत पसंद है। इस फिल्म की कहानी में बताया गया कि कैसे एजुकेशन सिस्टम में पनपे उस भ्रष्टाचार की जहां स्टूडेंट्स से रिश्वत लेकर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर और बैंक मैनेजर बनाया जाता है। राकेश एग्जाम में सेटिंग और टॉपर लड़कों की मदद से ये काम करता है। ऐसा ही एक टॉपर है सत्येंद्र सत्तू (सिंहदीप चटर्जी) जिसे राकेश, अकलमंद से नकलमंद बना देता है।

सत्‍तू का एक छोटा परिवार है। पिता ने कर्ज लेकर इंजीनियरिंग की कोचिंग करवाई। पढ़ाई में वो टॉपर रहने के साथ रैंक भी शानदार मिली। इंजीनि‍यरिंग टॉपर सत्तू पर राकेश की बुरी नजर पड़ जाती है। परिवार की मजबूरी के चलते सत्तू राकेश की रैकेट का हिस्सा बन जाता है। सत्तू का काम कमजोर स्टूडेंट की जगह परीक्षा में बैठकर उन्‍हें टॉप कराना है। उसे बदले में पैसे मिलने लगते हैं। सत्तू ड्रग्स की लत में भी फंस जाता है। उधर, नुपूर (श्रेया) को राकेश से प्यार हो जाता है। सत्तू का क्या होता है, नुपूर किस तरह राकेश की जिंदगी बदलती है। राकेश का क्या होता है, क्या वो अच्छा आदमी बनता है? ये तमाम बातें जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी।

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फिल्म का ट्रेलर

 

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