एसएमएस अस्पताल के वार्डों में गिर रहा प्लास्टर, मरीजों को जान-माल का खतरा

महानगर संवाददाता
अस्पताल प्रशासन ने निरीक्षण के लिए पीडब्ल्यूडी को लिखा पत्र, इंजीनियरों की कमेटी ने किया निरीक्षण
जयपुर। सूबे के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में इन दिनों अस्पताल के वार्डों से कहीं छत का प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं छत टपक रही है। ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानियों को देखते हुए एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने पीडब्लूडी को पत्र लिखकर सत्तर साल पुराने एसएमएस अस्पताल के निरीक्षण की मांग की। इसके बाद इंजीनियरों की कमेटी ने एसएमएस अस्पताल के भवनों का निरीक्षण किया।
इस मामले में एसएमएस अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि अस्पताल में मरीजों और परिजनों के जान-माल का खतरा देखते हुए पीडब्लूडी का निरीक्षण करवाया गया है। जिसकी जांच रिपोर्ट जल्दी ही आएगी। इसके बाद अस्पताल के वार्डों की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी
अस्पताल सूत्रों की मानें तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने एसएमएस अस्पताल के भवन का निरीक्षण कर लिया है। जिसकी जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। इसके बाद आगे की तैयारियां की जाएंगी । गौरतलब है कि एसएमएस अस्पताल के वार्डों में हर समय दो से तीन हजार मरीज भर्ती रहते हैं। इस दौरान वार्ड में भर्ती मरीजों की परेशानियों को देखते हुए यह जांच करवाई है।
बड़ा सवाल: कोई दुर्घटना हुई तो कौन होगा जिम्मेदार
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही एसएमएस अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के वार्ड का प्लास्टर गिर गया था। ऐसे में वार्ड में भर्ती बच्चा घायल हो गया था। गनीमत रही कि मासूम बच्चे को ज्यादा चोट नहीं आई लेकिन सीलिंग का प्लास्टर गिरने के बाद बच्चे को अलग वार्ड में भर्ती किया गया था। इसी तरह भामाशाह विभाग में डीडीसी काउंटर की छत गिर गई थी। हालांकि डीडीसी काउंटर पर कर्मचारियों के नहीं होने से इस दौरान भी कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इन घटनाओं के बाद अस्पताल में हड़कंप की स्थिति बन गई। इसी तरह थ्रीडी वार्ड में भी कुछ दिन पहले पूरा प्लास्टर गिर गया था। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानियां हुई थी।
ज्ञात हो कि एसएमएस अस्पताल के सिटी सर्जरी के ओटी में आग लगने के एक माह बाद भी अभी तक ओटी नहीं सुधर पाया है। ऐसे में अस्पताल में कई जगह अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। इस मामले में अस्पताल प्रशासन का तर्क है। ऐसे हालातों में अस्पताल में कोई घटना घट जाती है और मरीज को जान- माल का नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इन सब मामलों को देखते हुए अस्पताल का निरीक्षण पीडब्ल्यू के इंजीनियरों से करवाया है ताकि जिम्मेदारी तय हो सके ।

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