कर्नाटक चुनाव: दो कद्दावर के बीच खड़े है कुमारस्वामी

पहला सवाल क्या कर्नाटक में कांग्रेस पुन: सत्ता वापसी करेगी या भाजपा के विशाल कद के सामने घुटने टेक देगी? दूसरा सबसे बड़ा सवाल इन सबके बीच निकल कर सामने आ रहा है कि राज्य में तीसरा सबसे बड़ा दल जेडीएस क्या इस बार कोई बड़ा तीर चलाने जा रही है—- क्या त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में किंग मेकर का रोल अदा करेगी? इस तरह के कई सवाल जनता के मन में खलबली मचाए हुए है।

राजनीति क्रिकेट की आखिरी ओवर की तरह है जिसमें तीन गेंदों पर 17 रन बनाने होते है। यही हाल भारत की राजनीति का भी है। कुछ कहा नहीं जा सकता है। यहां अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्श पर लोगों को गिरते-उठते देखा है।

दो कद्दावर के बीच खड़े है कुमारस्वामी
कर्नाटक के राजनीतिक धरातल पर दो नाम सबसे उपर है, पहले खुद सीएम सिद्धारमैया जो कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता माने जाते है और दूसरे भारतीय जनता पार्टी से सीएम पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा। इन दो कद्दावर नेता के सामने किसी तीसरे के बारे में चर्चा कैसे करें। लेकिन हम उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। जनता दल (सेक्यूलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी भी सीएम पद के लिए चुनाव मैदान में अपनी भाग्य की जोर आजमाइश करते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें की राज्य के मैसूल क्षेत्र में कुमारस्वामी की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। इतना ही नहीं कुमारस्वामी की मैसूर, हासन, मंड्या, तुमकुरु समेत राजधानी बैंगलूरू की सीमा से सटे क्षेत्रों में कुमार स्वामी की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। कुमारस्वामी के चलते कर्नाटक के आगामी चुनाव में क्षेत्रीय दल जेडी-एस की भूमिका अहम मानी जा रही है। अगर राज्य में त्रिशंकु जैसी स्थिति बनती है तो कुमारस्वामी को समर्थन देने और सत्ता के गलियारे में  एंट्री लेने का सुनहरा अवसर मिल जाएगा।

किंगमेकर से किंग बनने का दावा
कुमारस्वामी ने तो दावा किया है कि वे इस चुनाव में किंगमेकर ही नहीं बल्कि बहुमत हासिल करके खुद किंग बनेंगे। बता दें कि असदुद्दीन औवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी चुनाव में कुमारस्वामी को समर्थन दिया है। अब तो ये मंगलवार को तय हो जाएगा कि कौन शेर है और कौन फिसड्डी।

वैसे कुमारस्वामी का राजनीतिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक पुत्रों की तरह ही मजबूत है। पिता एचडी देवगौड़ा देश के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वे रामानगर में पिछली बार 40 हजार वोटों से चुनाव में जीत हासिल की थी। इस बार कुमारस्वामी रामानगर के अलावा चन्नपटना से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे कुमारस्वामी बिना बहुमत पाए सीएम की कुर्सी पर विराजमान हो चुके हैं।

कभी पिता के खिलाफ चले गए थे
राजनीति में कोई अपना पराया नहीं होता है, कुमारस्वामी ने सत्ता पाने के लिए अपने पिता एचडी दैवगोड़ा के खिलाफ चले गए थे। उन्होंने इसका कारण बताया था कि कांग्रेस उनकी पार्टी को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने उस वक्त बीजेपी से हाथ मिलाया था। लेकिन इस बार के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों को अपना प्रतिद्वंदी बताते हुए बहुमत प्राप्त करने की बात कुमारस्वामी कर रहे हैं।




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