किसानों को खून के आंसू रुला रहा लहसुन-प्याज

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मंडियों में किसान प्याज लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन वो मंडियों में अपनी फसल बेच नहीं रहे हैं, वजह है फसलों के बेहद कम दाम. हताश किसान अब अपनी फसलों को बिना बेचे ही मंडी से वापस ले जाने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें मंडी में प्याज के दाम 30 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर अधिकतम 800 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं जोकि लागत से काफी कम है।
किसानों के मुताबिक उन्हें प्याज का अधिकतम मूल्य मिल भी जाए तो भी उनकी प्रति क्विंटल प्याज की लागत नहीं निकल पा रही है, यही हाल लहसुन का भी है. किसानों ने लहसुन के ज्यादा भाव मिलने के इंतजार में लहसुन का करीब 6 महीने तक सुरक्षित भंडारण किया, लेकिन अब उसके रख-रखाव का खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है. पिछले सीजन में प्याज के अच्छे भाव नहीं मिलने के बावजूद मालवा के किसानों ने नासिक प्याज की बम्पर बुआई की है और बम्पर उत्पादन भी देखने को मिल रहा है. लेकिन अब किसान प्याज के भाव देख खून के आंसू रोने को मजबूर हैं।
मध्यप्रदेश में बीते 2 सालों से हो रहे किसान आंदोलन के पीछे की वजह भी किसी से छिपी नहीं है. साल 2017 में मध्यप्रदेश के किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और 8 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन किया था, तब मंदसौर गोलीकांड में पुलिस की गोली लगने से पांच किसानों की मौत हो गई थी. जिसके बाद ये घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गई थी और पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ कई किसान संगठनों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया था।

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