केरल में बाढ़ के बाद रैट फीवर से 12 लोगों की मौत, इस बीमारी के 200 मामले सामने आए

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तिरुअनंतपुरम.  केरल में अगस्त में आई 94 साल की सबसे विनाशकारी बाढ़ के बाद महामारी का खतरा पैदा हो गया है। बाढ़ से प्रभावित जिलों में लेप्टोस्पिरोसिस बीमारी फैल रही है। इसे स्थानीय भाषा में ‘रैट फीवर’ कहा जाता है। सरकार के मुताबिक, रविवार तक 372 लोगों के रैट फीवर से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। इनमें से 12 की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। बाढ़ के बाद अलग-अलग बीमारियों से अब तक 54 लोगों की जान गई।

स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेप्टोस्पिरोसिस से बचाव के लिए प्रभावित इलाकों में मरीजों को एंटीबायोटिक्स (डोक्सीसिलिन) का कोर्स दिया जा रहा है। कोझिकोड़ जिले में इस बीमारी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। यहां इलाज के लिए अस्पतालों में अलग से वार्ड बनाए गए हैं।

क्या है लेप्टोस्पिरोसिस : ये एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो पानी के जरिए फैलता है। इसकी शुरुआत संक्रमित जानवरों के मूत्र से होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को बुखार के साथ छाती और मांसपेशियों में दर्द होता है।

नुकसाई की भरपाई के लिए 30 हजार करोड़ चाहिए : केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने कहा कि हमें सड़क, पुल और इमारतों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ रुपए चाहिए। वहीं, फसल और घरों के नुकसान के लिए हर परिवार को 10 हजार रुपए मुआवजा देना है। इसके लिए भी 10 हजार करोड़ की आवश्यकता है।

बाढ़ में 483 लोगों की जान गई : केरल में 8 अगस्त से भारी बारिश बारिश शुरू हुई थी। जलस्तर बढ़ने से छोटे-बड़े करीब 80 बांधों के गेट खोलने पड़े। 10 दिन तक राज्य के 14 में से 13 जिले भीषण बाढ़ से जूझते रहे। इस आपदा के चलते 438 लोगों की जान गई और राज्य को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। पेरियार नदी का पानी भरने से कोच्चि एयरपोर्ट को 15 दिन के लिए बंद करना पड़ा था।

मदद के लिए बनाया रीबिल्ड केरल ऐप : केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राज्य के आईटी विभाग ने ‘रीबिल्ड केरल’ ऐप बनाया। इससे बाढ़ में लापता हुए लोगों को ढूंढने में मदद मिलेगी। साथ ही, लोग अपने नुकसान के बारे में डिटेल भी दर्ज करा सकेंगे

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