कोरेगांव-भीमा हिंसा: हत्या के तीन आरोपियों को जमानत देने से कोर्ट का इनकार

मुंबई: भीमा-कोरेगांव हिंसा के तीन आरोपियों को मुंबई हाईकोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने आरोपियों की अंतरिम जमानत याचिका पर अगले महीने तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है. भीमा-कोरेगांव युद्ध के दो सौ साल पूरे होने के मौके पर पुणे में एक जनवरी को आयोजित उत्सव के दौरान सवर्णों और दलितों के बीच हिंसा हुई थी, जिसमें एक शख्स की जान चली गई थी.

हत्या के आरोप में 10 जनवरी से जेल में बंद तीनों आरोपियों ने जमानत के लिए इस हफ्ते अदालत में याचिका दायर की थी. इस मामले में कल संक्षिप्त जिरह सुनने के बाद अवकाशकालीन पीठ की न्यायाधीश भारती डांगरे ने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं है. इसके बाद उन्होंने याचिका पर सुनवाई अगले महीने तक के लिए टाल दी.

पुलिस के मुताबिक एक जनवरी को हुई हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने स्थानीय नागरिक राहुल फटांगडे की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

क्या है मामल

29 दिसंबर को पुणे के वडू गांव में दलित जाति के गोविंद महाराज की समाधि पर हमला हुआ था, जिसका आरोप मिलिंद एकबोटे के संगठन हिंदू एकता मोर्चा पर लगा और एफआईआर दर्ज हुई. 31 दिसंबर को दलित समाज के लोग पुणे के भीमा कोरेगांव में शौर्य दिवस मनाने इकट्ठा हुए और इसी दौरान सवर्णों और दलितों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें एक शख्स की जान चली गई और फिर हिंसा बढ़ती गई.

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