खेतों में चले हल पर बांधों में नहीं हलचल

महानगर संवाददाता
किसानों को गेहूं की बिजाई के लिए करना पड़ सकता है संघर्ष  प्रदेश के 831 बांधों में से 53 बांध पूर्ण रूप से भरे, 353 में पानी की आवक का इंतजार  बीसलपुर बांध का जलस्तर दो सेमी गिरा
जयपुर। जून और जुलाई माह को बांधों में जल भराव का उचित समय माना जाता है। लेकिन इस बार मानसून की बेरूखी के कारण आवक की तुलना मे निकासी ही अधिक हो रही है। प्रदेश में मानसून में अभी मानसून कमजोर पड़ हुआ है। वहीं, प्रदेश के अन्य राज्यों से हिस्सेदारी वाले चार अंतरराज्यीय बांध हैं। इन चारों बांधों में वर्तमान में पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जल ग्रहण क्षेत्रों में इस वर्ष कमजोर मानसून रहने से भाखड़ा व पोंग बांध लगातार खाली हो रहे हैं। भराव के पीक सीजन में भी आवक की कमजोर स्थिति से जल संकट की स्थिति बढ़ती जा रही है। हालात कुछ इस कदर हैं कि आधा मानसून गुजरने के बावजूद भाखड़ा बांध का लेवल 77 फीट व पोंग बांध का लेवल 40 फीट नीचे चला गया है। नाममात्र आवक होने से प्रदेश की चिंता बढ़ती जा रही है। यही हालात रहे तो आगामी रबी सीजन में किसानों को गेहूं की बिजाई के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। हालांकि मानसून का आधा सत्र अभी बाकी है। इसलिए जल संसाधन विभाग के अधिकारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आता मानसून भले सूखा रहा हो लेकिन जाता मानसून कुछ भला जरूर करेगा।
रणजीत सागर बांध में गत वर्ष की तुलना में छह मीटर कमी दर्ज की गई है। इसी तरह पोंग में 40 व भाखड़ा में 77 फीट की कमी दर्ज होने से पानी की कमी मानसून सत्र में महसूस की जा रही है। कुल भराव क्षमता की तुलना में जुलाई में अब तक भाखड़ा में 16 प्रतिशत व पोंग बांध में केवल 12 प्रतिशत पानी की आवक ही हुई है। जो जल संकट के हालात बयां करने को काफी है। पोंग बांध में आवक की स्थिति का सुधरना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस बांध में सर्वाधिक करीब 50 प्रतिशत शेयर राजस्थान का निर्धारित है।
दो करोड़ से अधिक लोगों का जीवन निर्भर
पंजाब की भाखड़ा, पोंग व रणजीत सागर बांधों से प्रदेश की इंदिरा गांधी, भाखड़ा, गंग कैनाल व सिद्धमुख-नोहर नहर परियोजनाओं को पेयजल व सिंचाई के लिए पानी मिलता है। इन नहरों से हनुमानगढ़, चूरू, श्रीगंगानगर, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, सीकर, झुंझुंनू आदि जिलों को जलापूर्ति होती है। इन नहरों पर दो करोड़ से अधिक लोगों का जीवन निर्भर है। बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में इस वर्ष कमजोर मानसून रहने से तकरीबन सभी बांध खाली हो रहे हैं।
बीसलपुर बांध
का जलस्तर दो
सेमी गिरा
बारिश का दौर थमते ही राजधानी की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में भी बीती रात से पानी की हो रही आंशिक आवक भी थम गई है। सोमवार सुबह बांध के जलस्तर में दो सेंटीमीटर गिरावट भी दर्ज हुई है। बीते तीन दिन से बांध का जलस्तर 309.37 आरएल मीटर दर्ज रहा वहीं बांध का जलस्तर दो सेमी घटकर 309.35 आरएल मीटर हो गया है। ऐसे में इस बार बांध से सिंचाई के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कटौती होने का अंदेशा गहराने लगा है। गौरतलब है कि सोमवार सुबह तक बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर की तुलना में अब तक बांध में महज 23 फीसदी पानी ही स्टोर है। पूर्ण रूप से बांध का भराव होने पर बांध से सिंचाई के लिए 8 टीएमसी और पेयजल के लिए 16.2 टीएमसी पानी सप्लाई होता है। लेकिन इस बार बांध में पानी कम होने पर क्षेत्र के करीब सवा लाख हैक्टेयर में होने वाली बुवाई के लिए बांध से छोड़े जाने वाले पानी को लेकर संकट के बादल अभी से मंडराने लगे हैं।
प्रदेश के 353 बांधों को
पानी की आवक का इंतजार
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के बड़े बांधों में पानी की उपलब्धता की बात की जाए तो राज्य के 22 बड़े बांधों में भराव क्षमता का 45 फीसदी पानी ही बचा है। प्रदेश के कुल 831 बांधों में से 53 बांध पूर्ण रूप से भरे हुए हैं व 425 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं जबकि अब भी 353 बांधों में पानी की आवक शुरू होने का इंतजार है।

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