गहलोत सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन पर डाली तिरछी निगाह

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जयपुर।  राज्य में सरकार बदलने के बाद से पिछली सरकार की योजनाओं को बदलने और निर्णयों को पलटने का क्रम जारी है. इसी बीच अब गहलोत सरकार ने आपातकाल के समय जेल में बंद रहे मीसा बंदियों पर नजर टेढ़ी कर दी है. सरकार इन बंदियों को मिल रही पेंशन और सुविधाओ को छीनने की तैयारी कर रही है. फिलहाल, पेंशन भत्ते में बढ़ोतरी आदि लाभ रोककर सरकरा ने इसके संकेत भी दे दिए हैं. एमपी की कमलनाथ सरकार पहले ही इस राह पर चल पड़ी है। 
आपातकाल में मीसा बंदियों को पिछली भाजपा सरकार ने लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया था. साथ ही इनकी पेंशन को बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दिया गथा. लेकिन, विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने मीसा बंदियों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाओं को बंद करते हुए लोकतांत्रिक सेनानी का दर्जा छीनने की तैयारी कर रही है. मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि इस पर निर्णय कैबिनेट की बैठक में किया जाएगा. लेकिन, माना जा रहा है कि सरकार ने पूरा मन बना लिया है. इसके संकेत मीसा बंदियों को मिलने वाली पेंशन भत्ते में बढो़तरी आदि लाभ के काम को रोककर दे दिए हैं. आपको बता दें कि एमपी में बनी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुकी है. आपको बता दें कि राज्य में 542 मीसा बंदी हैं. इनको मिलने वाली पेंशन सहित अन्य लाभ भाजपा और कांग्रेस की सरकार के बीच फुटबॉल बनकर रह गया है। 
 
जब भाजपा की सरकार सत्ता में आती है तो पेंशन को चालू कर दिया जाता है, जबकि, कांग्रेस की सरकार आने पर इसे बंद कर दिया जाता है.गौरतलब है कि  2008 में विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने इनके लिए पेंशन की योजना शुरू की थी. लेकिन, चुनाव के बाद सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार ने 2009 में इसे बंद कर दिया था. जबकि, 2013 में वापस मीसा बंदियों के लिए पेंशन की शुरुआत करते हुए इसकी राशि में बढ़ोतरी की थी. साथ ही इन्हें लोकतांत्रिक सेनानी का दर्जा भी दिया गया।

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