गिरिजाघरों में विशेष पूजा एवं जूलूस से ईसा मसीह को याद किया

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GUWAHATI, MARCH, 30
लखनऊ/गुहावटी। दुनिया भर में ग्रुड फ्राइडे मनाया जा रहा हैं। भारत में भी इसकी धूम देखने को मिल रही हैं। इस अवसर पर गिरिजाघरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा हैं। गुहावटी में गुरूवार को यीशु मसीह के रूप में कपडे पहने एवं उन्हे सलीब ले जाते हुए एक जुलूस निकाला गया। शुक्रवार को ईसा मसीह की तरह उन्हे सूली पर चढ़ाने एवं उनके प्रवचन देने का माहौल था। इसी प्रकार से लखनऊ में हजरतगंज स्थित कैथेड्रल चर्च में बिशप जेराल्ड जॉन मथायस छह महिला समेत 12 लोगों के पांव धोऐं। इससे पहले चर्च में प्रार्थना हुई।
पवित्र गुरुवार मनाया:
कैथलिक डायसिस ऑफ लखनऊ के चांसलर डॉ. डोनाल्ड एचआर डिसूजा ने बताया कि सलीब पर चढऩे से एक दिन पहले प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोज किया था। इसी दिन के उपलक्ष्य में हर साल ‘गुड फ्राइडे से पहले गुरुवार को ‘पवित्र गुरुवार कहा जाता है। गुरुवार को सभी चर्चों में भक्तों ने प्रभु यीशु की प्रार्थना व अराधना की।  कैथेड्रल चर्च में ‘पवित्र गुरुवार परम प्रसाद व पुरोहिताई के रूप में मनाया। शाम छह बजे विशेष पूजा शुरू हुई। वहीं असेंबली ऑफ बिलीवर्स चर्च के पादरी कुमार मॉरिस ने बताया कि मान्यता है कि प्रभु यीशु अमर हैं। वह फिर से जन्म लेंगे। प्रभु ने पापियों को खत्म करने के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया हैं।
गुड फ्राईडे पर धार्मिक अनुष्ठान:
गुड फ्राइडे के दिन कैथेड्रल चर्च में शाम चार बजे सलीब का जुलूस निकाला गया। असेंबली ऑफ बिलीवर्स चर्च अलीगंज में, सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च कैंट रोड पर प्रार्थना सभा और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।  कहा जाता है कि ईसा मसीह के सलीब तीन घंटे तक थे। उस समय सलीब पर चढ़ाने वालो की ओर इशारा करते हुए सात वचनों को कहा था। जैसे  ‘हे पिता इन्हें मना कर क्योंकि यह नहीं जानते कि यह क्या कर रहे हैं। प्राण त्यागने से पहले प्रभु ने परमेश्वर की उद्धार की योजना पूरी होने पर कहा कि ‘पूरा हुआ- ‘हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरी हाथों में सौंपता हूं, आदि प्रवचनों का मनन किया गया।

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