गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू की ट्रांसलेटर बनी रेहान फजल 

गोल्डकोस्ट। वेटलिफटर सिखोम मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने वजन के दोगुने से भी ज्यादा वजन उठा कर भारत को सोना दिलवाया। लाल रंग की ड्रेस पहने हुए चानू ने आते ही पाउडर लगा कर अपने हाथों की नमी दूर की। वो अकेली प्रतिभागी थीं, जिन्होंने वजन उठाने से पहले धरती को चूमा। दर्शकों का अभिवादन किया और फिर बार को भी माथे से लगाया।
राष्ट्रमंडल खेलों के रिकार्ड तोडे:
उन्होंने छह बार ‘स्नैच’ और ‘क्लीन और जर्क’ में वजन उठाया और छहों बार राष्ट्रमंडल खेलों का रिकार्ड ध्वस्त किया। दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली मॉरीशस की भारोत्तोलक रनाईवोसोवा ने उनसे 26 किलो कम वजन उठाया। जैसे ही चानू को पता चला कि उनका स्वर्ण पदक पक्का हो गया है, वो नीचे दौड़ कर गईं और उन्होंने अपने कोच को गले लगा लिया। मेडल सेरेमनी में जब भारत का झंडा ऊपर जा रहा था तो चानू बहुत मुश्किल से अपने आंसू रोक पा रही थीं।
मदद की पड़ी जरूरत:
जब वो स्वर्ण पदक जीतने के बाद ‘मिक्स्ड जोन’ में आईं तो ऑस्ट्रेलियन टीवी की संवाददाता उनका इंटरव्यू लेने पहुंच गई। चानू को उसके अंग्रेजी में पूछे सवाल समझ में नहीं आ रहे थे। रेहान फजल ने आगे बढ़ कर उन सवालों और चानू के जवाबों का अनुवाद किया। कुछ ही मिनटों में वो ऑस्ट्रेलियन टीवी पर थीं। 23 साल की मीराबाई चानू ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने इस जीत को अपने परिवारवालों, अपने कोच विजय शर्मा और मणिपुर और भारत के लोगों को ‘डेडिकेट’ किया।

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