ग्रामीण विकास कार्यों की रैंकिंग में पिछड़ा जयपुर जिला

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जयपुर। मनरेगा कार्यों के लिहाज से जिले की पंचायत समितियों की परफोरमेंस में जबरदस्त गिरावट दर्ज की जा रही है। मनरेगा कार्यों में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति और पारदर्शिता के साथ इनके संचालन के दावे कर रहे अधिकारियों को पिछले कुछ सालों से रैंकिंग की कसौटी पर खरा नहीं उतरने से झटका जरूर लगा है लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लापरवाह कार्मिकों को नोटिस थमाने की रस्म अदायगी के सिवा जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति किसी तरह की सख्ती बरतने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

यह है रैंकिंग का आधार
मनरेगा योजना में 11 महत्वपूर्ण बिन्दु जैसे मानव दिवस सृजन, व्यक्तिगत लाभ के कार्य, कन्वर्जेन्स, कृषि सम्बंधी कार्य, प्रशासनिक व्यय एवं लाइन विभागों से समन्वयक के कार्यों को समायोजित कर रैंकिग प्रणाली लागू की गई है।

थम नहीं रही हैं मनरेगा में अनियमितताएं
जयपुर शहर से सटे और जिले के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के हजारों किसानों को मनरेगा कार्यों में कड़ी मेहनत करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। वर्ष की प्रथम छमाही में जयपुर जिले की आधा दर्जन से भी ज्यादा पंचायत समितियों में मजदूरों का भुगतान तय समय पर नहीं मिलने की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली। राजधानी से सटी पंचायत समितियों के भी सैकड़ों मजदूरों को लंबे समय तक अपेक्षित अवधि के लिए रोजगार ही मुहैया नहीं हो पाया और जब रोजगार मिला तो इनको समय रहते भुगतान नहीं मिल पा रहा है।

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