चीन-पाक के साथ यह देश भी बना भारत का दुश्मन

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अब्बास का नेपाल दौरा…भारत की बढ़ी मुश्किल

काठमांडू। भारत के लिए चीन और पाकिस्तान हमेशा से टेंशन का कारण रहे हैं। अब इस फेहरिस्त में एक नया नाम और जुड़ गया है। वह कोई और नहीं बल्कि भारत का पड़ोसी मुल्क नेपाल है। यह नाम सुनकर आप सभी का चौंकना लाजिमी है, क्योंकि, नेपाल से भारत के रिश्ते हमेशा दोस्ताना रहे हैं। लेकिन, नेपाल में सत्ता पलटने के बाद ये दोस्ताना सम्बंध कितने दिन तक टिके रहेंगे, इस पर संशय है। अभी नेपाल के सिंहासन पर वाम गठबंधन की सरकार आरूढ़ है। वहीं नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चीन की झुकाव वाला माना जाता है। इन सभी के बीच नेपाल में पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी का पहुंचना भी इस खतरे की ओर इशारा कर रहा है। क्योंकि, कूटनीतिक रूप से देखा जाए तो पाक पीएम का यह नेपाल दौरा काफी अहम है। क्योंकि, पाक तो पहले से ही चीन का दोस्त है। अब नेपाल सरकार भी चीन का समर्थन करने वाली है। ऐसे में नेपाल में पाक पीएम का होना कम से कम भारत के लिए तो फिलहाल खतरे से पहले अलार्म की तरह है।

अब्बासी पहले पाक पीएम

पाक पीएम अब्बासी नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आमंत्रण के बाद दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे हैं। ओली के कार्यभार संभालने के बाद अब्बासी पहले वरिष्ठ विदेशी नेता हैं जो नेपाल यात्रा पर आए हैं। अपनी यात्रा के दौरान अब्बासी नेपाली राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से भी मुलाकात करेंगे। अब्बासी पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री हैं जो तीन साल के अंतराल के बाद नेपाल के दौरे पर आए हैं।

सार्क सम्मेलन पर नेपाल से मांगा समर्थन

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, दोनों पीएम के बीच दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन को दोबारा प्रभाव में लाने पर सहमति भी बनी। अब्बासी ने 19वें सार्क सम्मेलन की मेजबानी की इच्छा जाहिर की तो दूसरी तरफ नेपाल से इसके पक्ष में माहौल बनाने को कहा। बता दें कि 19वां सार्क सम्मेलन साल 2016 में पाकिस्तान में ही होना था, लेकिन जम्मू-कश्मीर के उड़ी आर्मी बेस पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इसका बहिष्कार कर दिया था। भारत के साथ ही बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया था जिसके बाद सम्मेलन को टाल दिया गया था। अब पाकिस्तान नेपाल के साथ मिलकर इस सम्मेलन को दोबारा आयोजित करने की जुगत में है।

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