जयपुर की 19 सीटों ने ही कांग्रेस रणनीतिकारों की हालत पतली कर रखी है

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जयपुर।  भाजपा के गढ़ जयपुर में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस तमाम रणनीति बना रही है, लेकिन, पार्टी की राह  आसान होने का नाम नहीं ले रही है. जयपुर में सेंध लगाना ही कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा मुश्किल काम हो गया है. पार्टी के स्तर पर जयपुर शहर की ज्यादातर सीटों पर नाम लगभग तय हैं. लेकिन, इन सीटों पर प्रत्याशियों के बीच जारी रस्साकशी के चलते सियासी राह में कांटे ज्यादा नजर आने लगे हैं।
दरअसल, पिछले चुनाव में प्रदेश की राजधानी जयपुर में कांग्रेस की हालात यह थी कि जयपुर शहर और ग्रामीण की मिलाकर 19 सीटों में से केवल सीट पर खाता खोल पाई थी. कांग्रेस के खाते में केवल कोटपुतली की सीट आई थी. पार्टी की राजधानी में पतली हालत देख हाईकमान राहुल गांधी ने पहला रोड शो जयपुर ही किया था. जो कि सफल रहा. लेकिन, चुनाव से पहले टिकटों को लेकर आपसी खींचतान के चलते फिर से यहां की गणित बिगड़ती जा रही है. हालात यह है कि दो दिन पहले स्क्रीनिंग कमेटी में चर्चा होने के बाद फिर से जयपुर शहर की टिकटों को लेकर कमेटी के सदस्य अनोपचारिक चर्चा दिल्ली में कर रहे हैं.  वर्तमान में जयपुर जिलें 16 सीटों पर भाजपा का कब्जा है. जबकि, एक पर निर्दलिय, एक पर राजपा और एक सीट कांग्रेस के कब्जे में है. इन 19 सीटों में से 10 सीटें वो है जिनमे कांग्रेस दो या दो बार से ज्यादा चुनाव हार रही है.  जिनमें किशनपोल, सांगानेर, आदर्श नगर, मालवीय नगर, झोटवाड़ा ,विद्याधर नगर, शाहपुरा, फुलेरा, चाकसू ओर बस्सी है. चुनावी गर्माहट और टिकट को लेकर जारी माथापच्ची के बीच हम आपको जयपुर की 19 सीटों के सियासी गणित को बताते हैं. जिनके कारण कांग्रेस हाईकमान भी सोचने को मजबूर हो गए हैं।

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