जयपुर डेयरी ने खोला आरसीडीएफ के खिलाफ मोर्चा

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जयपुर। प्रदेश के डेयरी सेक्टर में घी को लेकर जबर्दस्त घमासान मचा हुआ है. राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अधिकारियों की अदूरदर्शिता और सही समय पर नहीं लिये गये उचित फैसलों के चलते प्रदेश की सहकारी डेयरियां करोडों का घाटा झेल रही हैं. इस घाटे के बोझ तले दबी डेयरियों ने अब आरसीडीएफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जयपुर डेयरी अध्यक्ष ने घी की मार्केटिंग में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुये इसके अधिकार डेयरी संघों को दिये जाने की मांग की है.

घी का उत्पादन तो मिल्क यूनियन्स द्वारा किया जाता है, लेकिन उसकी मार्केटिंग और दरें निर्धारित करने का अधिकार आरसीडीएफ के पास है. ऐसे में आरसीडीएफ के स्तर पर होने वाली लापरवाही का खामियाजा भी डेयरी संघों को ही उठाना पड़ता है. जयपुर डेयरी के अध्यक्ष ओमप्रकाश पूनिया का कहना है कि अगर आरसीडीएफ को घी की मार्केटिंग करनी है तो करे, लेकिन इससे पहले मिल्क यूनियन्स का सारा माल अपने अधिकार क्षेत्र में लेकर उन्हें पूरे पैसे का भुगतान किया जाये. डेयरी अध्यक्ष ने आरसीडीएफ में खुले तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां बिना कमीशनखोरी के कोई काम नहीं होता और इस भ्रष्टाचार का दंश मिल्क यूनियन्स भुगतती हैं.

पैटर्न पर चलना चाहते हैं, लेकिन फॉलो नहीं करते
जयपुर डेयरी अध्यक्ष का कहना है कि आरसीडीएफ गुजरात पैटर्न पर तो चलना चाहता है, लेकिन वहां प्रावधानों को फॉलो नहीं करता है. गुजरात में भी फैडरेशन ही घी की मार्केटिंग करती है, लेकिन उससे पहले मिल्क यूनियन्स का उत्पाद अपने अधिकार में लेकर उन्हें पूरा भुगतान कर दिया जाता है.

बड़ी मात्रा में स्टॉक के खराब होने की आशंका
उल्लेखनीय है कि डेयरी अधिकारियों की लापरवाही चलते बड़ी मात्रा में स्टॉक में पड़े घी के खराब होने की नौबत बनी हुई. अब प्रबंधन आनन-फानन में औने-पौने दामों में घी को खपाने की कोशिश में लगा हुआ है. बार-बार घी की दरों में कटौती करने के चलते डेयरियों को अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है. अब तक घी में घालमेल के आरोप-प्रत्यारोप पर चल रही डेयरी संघों की जंग अब घमासान में तब्दील होती जा रही है.

 

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