जयपुर ब्लास्ट की 10वीं बरसी: गुलाबीनगरी हो गयी थी लाल

जयपुर। आज 13 मई 2008 को हुए बम धमाकों की 10 वीं बरसी है। कहने को तो 10 साल बीत गए। लेकिन आज भी एक दशक बाद अपनों को खोने वाले परिजनों की आंखों से आंसू सूखे नहीं है। इनमें कुछ परिवार ऐसे भी है जिन्हें सरकार वादे कर पूरा करना भूल गई। वहीं, सबसे बड़ा सवाल कि दस साल बाद भी जयपुर ब्लास्ट के गुनाहगारों को सजा नहीं मिल सकी है। वहीं, तीन आतंकी तो पुलिस की गिरफ्त में ही नहीं आए है।

जयपुर बम ब्लास्ट के बाद आतंकियों पर शिकंजे के लिए बनी थी एटीएस

– 13 मई 2008 को जयपुर में बम ब्लास्ट के बाद राजस्थान में बीजेपी सरकार ने आतंकियों की धरपकड़ के लिए राजस्थान में एटीएस की स्थापना की। जिसका मुख्यालय जयपुर में स्थापित किया गया। इसके बाद कोतवाली और माणकचौक थाने में दर्ज आठ केसों का अनुसंधान एटीएस राजस्थान को सौंप दिया गया। अनुसंधान के दौरान एटीएस ने 11 आतंकियों को नामजद किया था। इनमें 5 आतंकियों को एटीएस राजस्थान ने गिरफ्तार किया। जबकि 2 आतंकियों को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। वे हैदराबाद में हुए ब्लास्ट केसों में वहीं स्थानीय जेल में बंद है। इसके अलावा 1 आतंकी को पिछले साल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। वहीं, 3 गुनाहगार अभी भी फरार है। जिनका 10 साल बाद भी एटीएस राजस्थान सुराग नहीं लगा सकी है।

एटीएस राजस्थान की गिरफ्त में है जयपुर के यह गुनाहगार

पहला: आरोपी आतंकी शहबाज हुसैन उर्फ शहबान अहमद उर्फ शानू (42) निवासी मौलवीगंज, लखनरु, उत्तरप्रदेश। जयपुर में 13 मई 2008 को हुए बम ब्लास्ट के बाद सबसे पहले एटीएस राजस्थान ने शहबाज को 8 सितंबर 2008 को ही गिरफ्तार कर लिया था।

दूसरा: आरोपी मोहम्मद सैफ (33) निवासी सरायमीर, आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसको 23 दिसंबर 2008 को गिरफ्तार किया गया।
तीसरा: आरोपी मोहम्मद सरवर आजमी (35) निवासी चांद पट‌टी, आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसे 29 जनवरी 2009 को गिरफ्तार किया गया।
चौथा: आरोपी सैफुर्रहमान उर्फ सैर्फुर (33) निवासी आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसको 23 अप्रेल 2009 को गिरफ्तार किया गया।
पांचवां: आरोपी सलमान निवासी निजामाबाद, उत्तरप्रदेश है। इसे 3 दिसंबर 2010 को एटीएस राजस्थान से गिरफ्तार किया था।
छठवां: आरोपी आरिज उर्फ जुनैद है। यह बाटला हाउस नई दिल्ली और मूल रुप से आजमगढ़, उत्तरप्रदेश का रहने वाला है। उसे पिछले वर्ष नवंबर माह में दिल्ली की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था।

ये दो आतंकी हैदराबाद जेल में बंद, राजस्थान लाने के प्रयास जारी

जयपुर ब्लास्ट में शामिल दो आतंकियों को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब ये दोनों आरोपी हैदराबाद जेल में बंद है। जयपुर में दर्ज मुकदमों में दोनों से पूछताछ होना बाकी है। इसके लिए इन्हें जयपुर लाने के प्रयास जारी है। लेकिन कानूनी पेचिदगियों के चलते अभी तक रास्ता साफ नहीं हुआ है। इन गिरफ्तार आतंकियों में पहला आरोपी असददुल्ला अख्तर उर्फ हड‌डी उर्फ डेनियल उर्फ असद उर्फ तबरेज उर्फ युनुस उर्फ मामू उर्फ रईस उर्फ हैदर उर्फ समीर है। यह आतंकी भी आजमगढ़, उत्तरप्रदेश का रहने वाला है। इसके अलावा दूसरा आरोपी अहमद अहमद सि‌द‌दी बप्पा उर्फ यासीन भटकल है। यह भी असददु‌ल्ला के साथ हैदराबाद जेल में बंद है।
ये तीन आतंकी 10 साल बाद भी फरार
– जयपुर बम ब्लास्ट केस में नामजद तीन आतंकी ऐसे भी है। जो कि 10 साल बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। ये जयपुर के अलावा देश के अन्य शहरों में हुए ब्लास्ट केस में भी नामजद बताए जा रहे है। इनमें मिर्जा शादाब बेग उर्फ मलिक है। दूसरा आरोपी साजिद बट और तीसरा आतंकी मोहम्मद खालिद है। ये तीनों आजमगढ़, उत्तरप्रदेश के रहने वाले है। इनकी तलाश एटीएस राजस्थान के अलावा अन्य शहरों की स्पेशल सेल भी कर रही है।

इन आपराधिक धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा

– जानकारी के अनुसार जयपुर बम ब्लास्ट के बाद आईपीसी 302, 307, 427, 120 बी, 121ए, 124ए, 153ए, धारा 3,4,5,6 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के अलावा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) की धारा 3,10,12, 16(1), 18,20,38 और 3 पीडीपीपी के तहत मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें चार मुकदमे जयपुर के कोतवाली थाने में और चार मुकदमे माणकचौक थाने में दर्ज करवाए गए थे। एटीएस की स्थापना के बाद ये सभी मुकदमे एटीएस राजस्थान को सौंप दिए गए। वहीं, इनका अनुसंधान चल रहा है। इनमें गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ पुलिस चालान पेश कर चुकी है। कोर्ट में ट्रायल चल रहा है।

जयपुर के परकोटे में इन जगहों पर हुए थे आठ ब्लास्ट: 71 की मौत और 164 हुए थे घायल
13 मई 2008 की शाम करीब 7:30 बजे को रोजाना की तरह परकोटे के बाजारों में काफी रौनक थी। भीड़ थी। इसी बीच शहर के प्रमुख आठ अलग अलग जगहों पर तेज धमाकों की आवाज हुई। शुरुआत में किसी ने समझा कि कोई सिलेंडर फटा होगा। लेकिन यह सिलेंडर नहीं बल्कि शक्तिशाली बम थे। जिन्होंने कई जानें छीन ली और सैंकड़ों लोगों को घायल कर दिया।

  1. पहला बम ब्लास्ट खंदा माणकचौक, हवामहल के सामने शाम करीब 7:20 बजे हुआ। इसमें 1 महिला की मौत हो गई। जबकि 18 लोग घायल हो गए थे।
  2. दूसरा बम ब्लास्ट त्रिपोलिया बाजार स्थित बड़ी चौपड़ के समीप मनिहारों के खंदे में ताला चाबी वालों की दुकानों के पास शाम करीब 7:25 बजे हुआ। यह ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि इसमें 6 लोगों की मौत हो गई। जबकि 27 लोग घायल हो गए।
  3. तीसरा बम ब्लास्ट शाम करीब 7:30 बजे छोटी चौपड़ पर कोतवाली थाने के बाहर पार्किंग में हुआ। इनमें 2 पुलिसकर्मियों सहित 7 जनों की मौत हो गई। जबकि 17 लोग घायल हो गए थे।
  4. चौथा बम ब्लास्टशाम दुकान नंबर 346 के सामने, त्रिपोलिया बाजार में शाम 7:30 बजे हुआ। इसमें 5 जनों की मौत हो गई। जबकि 4 लोग घायल हो गए।
  5. पांचवा बम ब्लास्ट चांदपोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के बाहर पार्किंग स्टैंड पर शाम 7:30 बजे हुआ। इनमें सबसे ज्यादा 25 लोगों की मौत हो गई। जबकि 49 लोग घायल हो गए। इनमें कार में सवार दो मासूम बहनों समेत कई दर्शनार्थी, दुकानदार, ग्राहक, भिखारी और राहगीर शामिल
  6. छठा बम ब्लास्टजौहरी बाजार में पीतलियों के रास्ते की कार्नर पर नेशनल हैंडलूम के सामने शाम करीब 7:30 बजे हुआ। इनमें 8 जनों की मौत हो गई। जबकि 19 घायल हो गए।
  7. सांतवा बम ब्लास्ट शाम ठीक 7:35 बजे छोटी चौपड़ पर फूलों के खंदे में देवप्रकाश ज्वैलर्स शॉप के सामने हुआ। इसमें 2 जनों की मौत हो गई। जबकि 15 लोग घायल हो गए थे।
  8. आठवां बम ब्लास्ट जौहरी बाजार में सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर के बाहर शाम 7:36 बजे हुआ। इसमें 17 लोगों की मौत हो गई। जबकि 36 लोग घायल हो गए थे।
  9. नौवे ब्लास्ट की कोशिश दुकान नंबर 17 के सामने चांदपोल बाजार में एक गेस्ट हाउस के बाहर। जिसमें रात 9 बजे का टाइमर सेट था, लेकिन 15 मिनट पहले बम स्कॉड टीम ने इसे डिफ्यूज कर दिया।

ब्लास्ट के बाद मजबूत राजस्थान पुलिस टीम

जयपुर में हुए बम ब्लास्ट के बाद अब राजस्थान पुलिस की टीम इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए काफी मजबूत है। इसके लिए जयपुर शहर में परकोटा क्षेत्र के अलावा प्रमुख बाजारों और रोड पर लगभग 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके है। इससे पहले बाजारों में 2008 में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। इससे आतंकियों की फोटो नहीं आ सकी थी। वहीं, एटीएस राजस्थान की स्थापना की गई। इसमें युवा कमांडोज की एक अलग विंग बनाई गई है। जिसका नाम है इमरजेंसी रेस्पांस टीम (ईआरटी)। यह टीम अत्याधुनिक उपकरणों और हथियारों से लैस है। साथ ही, इनकी रोजाना ट्रेनिंग चलती है।

इसके अलावा यह टीम शहर के प्रमुख होटल, बाजार, पर्यटक स्थल, मॉल्स, एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर आतंकी हमले की स्थिति में मूक डेमो कर तैयारी करती है। यह टीम किसी भी विपरित स्थिति में आतंकियों से निपटने में सक्षम है। वहीं, बम ब्लास्ट और आतंकी हमले की स्थिति से किसी भी वक्त निपटने के लिए राजस्थान पुलिस ने विदेश से करीब 75 लाख रुपए का एक रोबोट भी खरीदा है। यह बम डिफ्यूज करने, छिपे हुए आतंकियों की लोकेशन बताने और कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देने में सक्षम है।

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