जयपुर ब्लास्ट 2008 : पीड़ित परिवारों की आंखों में न्याय का इंतजार

राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए सालों पहले विशेष अदालत का गठन तो कर दिया, लेकिन अदालत में कभी विशेष अदालत की तरह काम नहीं हुआ। जयपुर बम कांड की विशेष न्यायालय होने के बावजूद भी इस अदालत में आम अदालतों की तरह दूसरे फौजदारी मामलों की ट्रायल और अपीलों पर सुनवाई हो रही है। हालांकि यह अभियोजन पक्ष की सफलता कही जाएगी कि प्रकरण में अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है।

एक गवाह दे रहे हैं कई बार गवाही

जयपुर शहर को दंश देने वाले इस मुकदमे की रफ्तार हमेशा कछुआ चाल ही रही। कभी जज के नहीं होने से तो कभी बचाव पक्ष के वकीलों ने तकनीकी आधार पर मामले में बहस करने से इंकार किया। घटना को दस साल बीतने के बाद भी अभी तक एक भी मुकदमे में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।

 

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