जयपुर में 48 साल बाद इस सीट से महिला उम्मीदवार

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राजस्थान की राजधानी जयपुर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है. इस लोकसभा सीट से आज कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल ने अपना नामांकन दाखिल किया. ज्योति खंडेलवाल के नामांकन से पहले गुटबाजी से जूझ रही राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने एकजुटता का मैसेज देने की कोशिश की है. 48 साल बाद ये पहला मौका है, जब जयपुर महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

कालबेलिया नृत्य, कच्ची घोड़ी डांस, बैंड बाजा के साथ भारी भरकम जुलूस लेकर कांग्रेस जयपुर लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार का नामांकन भरने गई. बता दें कि बहुत दिनों बाद कांग्रेस का ऐसा नजारा जयपुर की सड़कों पर दिखा. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने तमाम कयास और अनुमानों को दरकिनार करते हुए पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को जयपुर सीट से चुनावी मैदान में उतार कर सबको चौंका दिया था।

जयपुर लोकसभा सीट को देशभर में भाजपा के सबसे मजबूत किले में से एक माना जाता है. गुरुवार को नामांकन से पहले जयपुर में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट से लेकर जयपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास और ब्लॉक स्तर के नेता मौजूद रहें।

[‘यूपीए सरकार बनने पर नोटबंदी की जांच होगी’]

सभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा आजादी के बाद जयपुर में जो भी विकास कार्य हुए हैं, वह कांग्रेस की देन है, इसके बावजूद जयपुर की जनता का उतना प्यार कांग्रेस को नहीं मिल पाया, जिसकी वह हकदार हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में नोटबंदी के नाम पर एक बड़ा घोटाला किया गया है. यूपीए सरकार बनने पर नोटबंदी की जांच कराई जाएगी. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ इनकम टैक्स की कार्रवाई पर गहलोत ने कहा कि देश में एक भी भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, उन्होंने कहा कि क्या ये सब के सब दूध के धुले हुए हैं? गहलोत ने कहा कि ट्रकों में भरकर बीजेपी नेताओं के पास चुनाव के लिए नोट पहुंच रहे हैं।

गौरतलब है कि ज्योति खंडेलवाल को प्रत्याशी बनाने के पीछे जो अहम फैक्टर हैं उनमें उनका 2009 में महापौर के चुनाव में जीत दर्ज करना भी रहा. उस चुनाव में ज्योति ने जयपुर शहर से 4,32,000 वोट हासिल किए थे, जिसमें भाजपा की सुमन शर्मा को 13000 से ज्यादा मतों से हराया था. ज्योति खंडेलवाल ने कहा कि पूरी पार्टी एक है और हम जयपुर शहर की सीट जीतकर दिखाएंगे।

ज्योति खंडेलवाल अपनी तुनकमिजाजी और हमलावर पॉलिटिक्स के लिए जानी जाती हैं. यही वजह रही कि महापौर के तौर पर अपने कार्यकाल में कई विवादों से जुड़ी रहीं. ज्योति विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करने से भी नहीं चुकीं थीं. ऐसे में भाजपा के किले में सेंध लगाने के लिए भाजपा के मूल वोटर वैश्य समाज को साधने के साथ-साथ ज्योति को आज मंच पर मौजूद कांग्रेस के विधायकों और नेताओं को भी साथ रखना होगा. जयपुर सीट का परिणाम इन्हीं दो प्रमुख कारणों पर निर्भर करेगा।

दरअसल, ये 48 साल बाद यह पहला मौका है जब जयपुर लोकसभा सीट से महिला प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल चुनावी मैदान में हैं. इससे पहले 1962, 1967 और 1971 में लगातार तीन बार स्वतंत्र पार्टी से गायत्री देवी सांसद रही थीं. जयपुर लोकसभा सीट को ब्राह्मण सीट और भाजपा का गढ़ कहा जाता है. जयपुर में लोकसभा सीट पर 20 लाख 8,8058 मतदाता हैं जिनमें 9,87,797 महिला और 1,099,214 पुरुष मतदाता हैं।

आजादी के बाद से जयपुर में कांग्रेस सिर्फ 3 बार ही चुनाव जीत पाई है. कांग्रेस की तरफ से 2009 में डॉ. महेश जोशी यहां चुनाव जीते थे. उससे पहले 1984 में पंडित नवल किशोर शर्मा सांसद रहें, लेकिन 2014 में भाजपा के ब्राह्मण चेहरे रामचरण बोहरा ने महेश जोशी को 5,39,355 मतों से पराजित किया था, जो कि देश में चौथी सबसे बड़ी जीत थी।

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