झूले में विराजे आराध्यदेव, नौका में लक्ष्मीनारायणजी

0
27

महानगर संवाददाता
वर्षा ऋतु में जयपुर की परंपरागत मिजमानी को साकार कर रहे देवालय
जयपुर। मानसून के कारण सुहावने हुए मौसम में मंदिरों में विशेष झांकियों का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। आराध्यदेव गोविंददेवजी मंदिर में शुक्रवार को झूला झांकी सजाई गई। हरे रंग की पोशाक धारण कर ठाकुरजी चांदी के झूले झूलते हुए नजर आए।

श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से ठाकुरजी को झूला झुलाया। गोविंददेवजी मंदिर में झूला झांकी के आयोजन 26 अगस्त तक चलेंगे। वहीं बड़ी चौपड़ स्थित लक्ष्मी नारायण बाईजी मंदिर में शुक्रवार सुबह नौका विहार की झांकी सजाई गई। मंदिर महंत पुरुषोत्तम भारती के सान्निध्य में सुबह ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक कर ऋतु पुष्पों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर के गर्भगृह में नौका विहार की झांकी सजाई गई।

ठाकुर श्रीलक्ष्मीनारायण और लक्ष्मीजी नाव में बैठे हुए नजर आए। शालिगरामजी को धातु की नाव में विराजमान किया गया। मंदिर महंत पुरुषोत्तम भारती ने बताया कि यहां रियासतकाल से ही ऋतु के अनुसार ठाकुरजी की झांकियां सजाई जाती रही हैं।

सावन में वर्षा होने के बाद जब नदी, तालाब और सरोवर पानी से लबालब हो जाते थे, तब ठाकुरजी को तालाब में नौका विहार करवाया जाता था। ठाकुरजी के प्रतीक के रूप में शालिग्राम जी को नौका में विराजमान कर सरोवर में घुमाया जाता था। हालांकि अब ऐसा नहीं होता, इसलिए मंदिर के गर्भ गृह में ही नौका विहार की झांकी सजाकर इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। शनिवार को झूला महोत्सव मनाया जाएगा। ठाकुरजी फूलों के झूले में विराजमान होंगे। रविवार को लहरिया महोत्सव होगा। ठाकुरजी को लहरिया धारण करवाया जाएगा। सोमवार को तीज महोत्सव में घेवर और खीर का भोग लगेगा। मंगलवार को वन विहार की झांकी होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...