तीन सालों में पुलिस पर 235 बार हुई फायरिंग

महानगर संवाददाता अलवर। मेवात इलाके के अलवर और भरतपुर जिले में गोतस्कर गत तीन बरसों में पुलिस पर 235 बार फायरिंग, पथराव और हमले की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

इन जिलों में गोतस्कर जमकर खूनी खेल खेलते हैं।

राजस्थान और हरियाणा के बॉर्डर पर गोतस्कर बेपरवाह होकर गोतस्करी की वारदातों को अंजाम दे रहे हंै, वहीं पुलिस जान हथेली पर लेकर उनका मुकाबला कर रही है।

गोतस्कर पकड़े जाने की स्थिति में पुलिस या आम आदमी दोनों पर फायरिंग करने से भी नहीं चूकते हैं।

यहां गोतस्करों और पुलिस के बीच फायरिंग आम बात है। गत तीन बरसों के दौरान अलवर और भरतपुर जिले में गोतस्कर पुलिस पर 235 बार फायरिंग, पथराव और

हमले की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। यानी औसतन प्रत्येक चार या पांच दिन में पुलिस और

तस्करों की भिड़ंत होती है। बहुत सी बार तो पुलिस फायरिंग के बाद मामला ही दर्ज नहीं करती है।

यहां होती है तस्करी

राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़, शाहजंहापुर, नीमराणा, भिवाड़ी, तिजारा, रामगढ़, गोविंदगढ़ और नौगावां की सीमा हरिणाणा से जुड़ती है।

वहीं भरतपुर के पहाड़ी, कैथवाड़ा, कामां और सीकरी की सीमा हरियाणा को छूती हैं।

दोनों जिलों के यही वो इलाके हैं जहां से गोतस्कर प्रदेश से गोवंश की तस्करी करते हैं।

यहां से गोवंश की तस्करी करके उन्हें हरियाणा के नूंह व मेवात में ले जाया जाता है।

पुलिस कई बार इसलिए नहीं करती मामले दर्ज

पर फायरिंग व हमले के बहुत से ऐसे मामले हैं जब

गोतस्करों के खिलाफ मुकदमा ही दर्ज नहीं गया। वजह साफ है

कि ऐसे मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना पड़ता है।

बाद में उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है

इसलिए थानों में पेंडेंसी बढ़ती जाती है। लिहाजा पुलिस बहुत सी बार गोतस्करी के मुकदमें ही दर्ज नहीं करती है।

कई मारे गए, कई हो चुके घायल’

अलवर जिले में गोतस्करी के मामलों की वजह से अब तक पहलू खान, उमर खान और तालीम खान की मौत हो चुकी है। 50 से अधिक गोतस्कर घायल हो चुके हैं।

खेरली थाना क्षेत्र के एक एएसआई मि_नलाल सैनी की मौत हो चुकी है।

करीब 50 से अधिक पुलिसकर्मी विभिन्न हमलों में घायल हो चुके हैं.

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