…तो जिनपिंग के हाथ ही होगा ड्रेगन का रिमोट

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बीजिंग। चीन ने बरसों पुरानी परिपाटी को बदलने की कवायद शुरू कर दी है। अगर यह कवायद सफल रही तो चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी-जिनपिंग के हाथों ही चीन की बागडोर रहेगी। दरअसल, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति के कार्यकाल पर लगी सीमा को हटाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से मौजूदा नेता शी-जिनपिंग को सत्ता में बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस घोषणा की उम्मीद कई लोगों को थी, क्योंकि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बन चुके हैं। उनके साथ पार्टी के धड़ों की वफादारी है, सेना और व्यापारी वर्ग है। इसके चलते वे देश के क्रांतिकारी संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं। इस समय शी जिनपिंग की तस्वीरों के होर्डिंग पूरे देश में लगे हुए हैं और सरकारी गानों में उनके आधिकारिक छोटे नाम, ‘पापा शीÓ का इस्तेमाल होता है।

पार्टी से बड़ा हुआ कद

दशकों तक कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन पर राज किया है। लेकिन पार्टी के सबसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति के हाथ में सीमित समय के लिए ही कमान आती थी। एक दशक के बाद नेता दूसरे नेता के हाथ में सत्ता पकड़ा देता था। शी जिनपिंग ने पद पर बैठने के शुरुआती दिनों में ही इस सिस्टम को तोडऩा शुरू कर दिया था। उन्होंने तुरंत एक भ्रष्टाचार विरोधी कैम्पेन शुरू किया। इससे रिश्वत लेने या सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले 10 लाख से ज्यादा पार्टी प्रतिनिधि अनुशासित हो गए। इस कैम्पेन ने शी जिनपिंग के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को भी खत्म कर दिया और शक जताने वालों को भी चुप करवा दिया। इसी वजह से अब जिनपिंग का कद उनकी पार्टी से भी -बड़ा है।

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