दिव्यांगों को दया नहीं प्रेमपूर्वक सेवा की जरुरत : गुर्जर

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जयपुर। देश के दिव्यांगों को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम), नागपुर का राष्ट्रीय अधिवेशन शनिवार को जामड़ोली स्थित केशव विद्यापीठ के अष्टावक्र सभागार में शुरू हुआ।
केन्द्रीय मंत्री किशनपाल गुर्जर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुहास राव हिरमेठ, सक्षम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दयालसिंह पंवार ने अधिवेशन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर देश के लगभग सभी प्रांतों एवं प्रमुख शहरों से करीब 1600 दिव्यांगजन उपस्थित थे।

अलग-अलग भाषा, रंग, वेशभूषा के दिव्यांगजनों को एक ही छत के नीचे देखकर केशव विद्यापीठ में लघु भारत साकार हो गया। प्रकृति ने इन दिव्यांगों में कुछ अपूर्णता दी है। कोई हाथ से वंचित है तो किसी के पैर नहीं है। कोई आंखों से लाचार है तो कोई सुन-बोल नहीं पाता। किसी के ये सभी अंग हैं लेकिन सेरिबल्स पॉल्सी ने जकड़ रखा है जिससे इनका अपने ही शरीर पर नियंत्रण नहीं है। इन लोगों को समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) की अलग-अलग इकाइयों के सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने इन दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यक्ता के अनुसार सहायता प्रदान कर उन्हें समाज के एक अभिन्न अंग के रूप में स्थापित किया है।

सक्षम के सहयोग से ये दिव्यांगजन न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं वरन् परिवार का भी पालन-पोषण कर रहे हैं। सक्षम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दयाल सिंह पंवार ने सक्षम की नई कार्यकारिणी की घोषणा की और कहा कि सक्षम के कार्य को पूरे भारत में फैलाया जाएगा। स्वागत समिति के अध्यक्ष गणेश राणा, सचिव डॉ. एस एस अग्रवाल, सह सचिव डॉ. गिरधर गोयल ने अतिथियों का स्वागत किया।

30 सितंबर रविवार को सुबह 9.45 से 11.30 तक सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहनराव भागवत का विशेष उद्बोधन होगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और सशक्तिकरण मंत्री थावरचंद गहलोत भी उपस्थित रहेंगे। 30 सितंबर को ही अपराह्न 3.30 बजे से शाम 5 बजे तक रामनिवास बाग के यूनियन ग्राउंड से बड़ी चौपड़ होते हुए रामलीला मैदान तक दिव्यांगों की शोभायात्रा निकाली जाएगी।

पीड़ा से जगता है सेवा का भाव

अखिल भारतीय स्वयंसेवक संघ की कार्यकारण के सदस्य सुहासराव हिरमेठ ने कहा कि अधिवेशन में कश्मीर से कन्याकुमारी, सौराष्ट्र से मणिपुर के कार्यकर्ताओं ने उपस्थिति दर्ज करवा कर यहां लघु भारत को जीवंत कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज सक्षम संस्था दिव्यांगों को स्वावलंबी और स्वाभिमानी बनाकर राष्ट्र निर्माण में लगा रही है।

अब इस कार्य का विस्तार करना होगा। अभी संस्था देश के लगभग 300 जिलों में कार्य कर रही है। अब यह संख्या बढ़ाकर दोगुनी करनी होगी। इसके लिए संस्था के प्रतिनिधि यहां से संकल्प लेकर जाएं कि वे अपने जिले में दिव्यांग सहायता केन्द्र खोलेंगे। जो जिला अच्छा कार्य कर रहा है वह दूसरे जिले को गोद लेगा।

उन्होंने कहा कि दिव्यांागों के कल्याण के लिए जो अन्य संस्थाएं कार्य कर रही हैं उनको भी साथ लेना होगा। लोगों से नम्रता से बात कर उन्हें सक्षम का साहित्य भेंट करें। दिव्यांगों की पीड़ा देख कर मन में संवेदना जागृत होती है। जिसके मन में संवेदना जागृत हो जाती है वो व्यक्ति सेवा में जुड़ जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में सेवा करने वाले लोगों और इस कार्य में सहयोग करने वाले व्यक्तियों की कोई कमी नहीं है।

अपराध और लूटमार में लगे लोगों की संख्या के बजाय समाज की सेवा में लगे लोगों की संख्या कई गुना है। लेकिन मीडिया की दृष्टि में उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की सेवा के प्रति लोगों में विश्वास जगाना जरूरी है। विश्वास जग गया तो लोग सहयोगी बनेंगे। उन्होंने कहा कि देश में परिवर्तन संगठन की शक्ति से ही होता है। महापुरुष केवल प्रेरणा देते हैं।

केशव विद्यापीठ में दिव्यांगों के कृत्रिम हाथ-पैर, जूते, बे्रल लिपि, घड़ी सहित अनेक सामान भी उपलब्ध है। संक्षम के माध्यम से दिव्यांगों ने कई उत्पाद भी बनाकर यहां प्रदर्शित किए हैं। प्रदर्शनी में सक्षम के माध्यम दिव्यांगों के कल्याण से जुड़े देशभर में किए जा रहे कार्यों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं।

इनके अलावा सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी स्टॉल लगाकर दिव्यांगों से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध करवा रहे हैं। पूरे परिसर में देश-विदेश के उन दिव्यांगों के होर्डिंंग लगाए गए हैं, जिन्होंने दिव्यांगता पर विजय पाकर अपनी एक अलग पहचान कायम की है।

हर साल बढ़ाया दिव्यांग कल्याण का बजट
केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि दिव्यांगजन समाज के अभिन्न अंग हैं। इन्होंने शिक्षा और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दिव्यांगों को दया नहीं, प्रेमपूर्वक सहायता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं और थावरचंद गहलोत ने केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारित व सशक्तीकरण मंत्रालय का काम संभाला है, तब से सरकार दिव्यांगों के लिए अनेक नई योजनाएं लेकर आई है।

हमारी सोच है कि जिसने जन्म लिया है, उसे जीने का अधिकार है। सरकार ने दिव्यांगों को स्वावलंबी बनाने के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। पहले दिव्यांगजनों के लिए जो बजट दिया जाता था वह खर्च ही नहीं होता था, लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में बजट 6 माह में ही खर्च हो जाता है और बाद में अतिरिक्त बजट की मांग की जाती है।

लगातार चार साल में दिव्यांगों के लिए बजट में वृद्धि हो रही है। पहले दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग परम्परागत तकनीक से निर्मित होते थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने जर्मनी और इंग्लैंड की सरकार से समझौता कर नई तकनीक के अंग उपलब्ध करवा रही है। यही नहीं उच्च तकनीक के

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