दिव्यांग छात्रों को वापस मिलेगा किताबों और यूनिफॉर्म का पैसा

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नई दिल्ली। मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि दिव्यांग बच्चों को स्कूल आवागमन के साथ किताब और ड्रेस के खर्च का भुगतान किया जाए। रविवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में  केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने यह जानकारी दी।

मौका था नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेब्लड पीपुल एंड माइंड ट्री (एनसीपीईडीपी) के हेलेन केलर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह का।

मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि  दिव्यांग बेटियों को प्रति माह 200 रुपये की मदद की योजना भी शुरू हुई है। जल्द ही सभी स्कूलों को कम से कम 5 फीसदी प्रवेश आरक्षण देने की योजना है।

एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने बताया कि वर्ष 1999 में हेलेन केलर पुरस्कार से शुरू हुआ। देश की करीब 100 कंपनियों में सर्वे के बाद संस्थान को यह परिणाम मिला है

कि सरकारी विभागों में 0.54 फीसदी, निजी क्षेत्रों में 0.28 और मल्टीनेशनल कंपनियों में 0.05 फीसदी ही दिव्यांगों को रोजगार मिला है। दिव्यांगों के लिए रोजगार सृजन करने वाली कंपनियों को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया जाता है।
ये हुए पुरस्कृत
कार्यक्रम के दौरान तीन श्रेणियों में चयनित सर्वश्रेष्ठ लोगों को पुरस्कृत किया गया। इनमें पहली श्रेणी में अमृतसर के दविंदर सिंह, बेंगलूरू  के नवीन और मूसा चौधरी गोरेपती एवं त्रिवेंद्रम से टिफनी शामिल हैं।

वहीं श्रेणी दो में दिल्ली से अराधना लाल, मुंबई से बीएस नागेश और जलगांव से यर्जुवेंद्र अनिल महाजन को सम्मानित किया गया। श्रेणी तीन में हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी फॉउंडेशन, मुंबई स्थित स्केवयर मील, दिल्ली से द लिप्रेसी मिशन ट्रस्ट इंडिया और मुंबई एवं वैल्लोर से क्रमश : ट्रेंट हाइपर मार्केट व वर्थ ट्रस्ट शामिल हैं।

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