न्यायपालिका को खत्म करने में जुटे हैं कुछ वकील : SC

जजों के खिलाफ अविश्वास फैला रहे वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जताई है. कोर्ट ने कहा है कि ऐसे लोग संस्था की हत्या कर रहे हैं. केरल में मेडिकल कॉलेज दाखिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा अपनी नाराजगी रोक नहीं पाए. उन्होंने कोर्ट में पेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ वकील विकास सिंह से कहा, “आज कल किसी को भी नहीं बख्शा जा रहा. एक ही तीर से सब पर निशाना लगाया जा रहा है. कुछ लोग हर व्यक्ति को मार देना चाहते हैं.”

जज ने आगे कहा, “लोग कोर्ट में हुई हर बात पर टीवी में चर्चा करना चाहते हैं. जजों को अपमानित किया जा रहा है. हर रोज़ न्यायपालिका की हत्या की जा रही है. संस्था रहेगी, तभी वकील रहेंगे.”

साफ है कि मंगलवार को जिस तरह से कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने अपनी याचिका कोर्ट से वापस ली और उसके बाद उनके वकीलों कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने मीडिया में जो बयान दिए, उससे जस्टिस अरुण मिश्रा नाराज़ हैं. जस्टिस मिश्रा भी इस मसले पर सुनवाई करने बैठी संविधान पीठ का हिस्सा थे.

मामला चीफ जस्टिस को पद से हटाने से जुड़ा होने के चलते चीफ जस्टिस और उनके खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले 4 वरिष्ठ जज सुनवाई नहीं कर सकते थे. ऐसे में मामला वरिष्ठता क्रम में छठे से दसवें नंबर के जजों को सौंपा गया. जस्टिस सीकरी की अध्यक्षता में बैठी इस बेंच में जस्टिस एस ए बोबडे, एन वी रमना, अरुण मिश्रा और ए के गोयल शामिल थे. इनमें से जस्टिस बोबडे और जस्टिस रमना भविष्य में चीफ जस्टिस भी बनने वाले हैं. लेकिन सांसदों के वकील कपिल सिब्बल ने इस बेंच के गठन पर ही सवाल उठा दिया.

सुनवाई के दौरान सिब्बल इस बात पर अड़ गए कि उन्हें वो आदेश दिखाया जाए जिसके तहत 5 जजों की बेंच का गठन किया गया है. बाद में उन्होंने दलीलें रखने से इंकार करते हुए याचिका वापस ले ली. सुनवाई के बाद सिब्बल के साथी वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस को बचाने के लिए बेंच के गठन का आरोप लगाया. खुद सिब्बल ने भी मीडिया में ‘रातों रात’ इस बेंच के गठन पर सवाल उठाए.

इससे पहले भी वकीलों का एक वर्ग जस्टिस अरुण मिश्रा पर निशाना साधता रहा है. वकीलों के हमले से परेशान होकर उन्होंने जज लोया मौत मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. अब दूसरे जजों के प्रति भी अविश्वास जताया जा रहा है.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने वरिष्ठ वकीलों और बार एसोसिएशन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ये बेहद निराशाजनक है कि वरिष्ठ वकीलों और बार एसोसिएशन के अधिकारियों ने इस मसले पर खामोशी अपना रखी है.

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