पाकिस्तानी फिर लेगा आईएमएफ से कर्ज

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पाकिस्तानी।  पिछले हफ्ते वित्त मंत्री असद उमर की अध्यक्षता में हुई ईएसी की बैठक में यह सुझाव सामने आए हैं. असल में निर्यात घटने और आयात बढ़ने की वजह से पाक में डॉलर की कमी हो गई और वहां के रुपये पर दबाव बढ़ा है. विदेशी मुद्रा भंडार घटता जा रहा है. इसकी वजह से ज्यादातर वित्त विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान को फिर से आईएमएफ से राहत पैकेज के रूप में कर्ज लेना पड़ेगा. 1980 के दशक से अब तक पाकिस्तान आईएमएफ से 14 बार कर्ज ले चुका है।

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की हालत खराब है. ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तानी को फिर से IMF से कर्ज लेना होगा. लेकिन पहले से भारी कर्ज बोझ से दबी सरकार अब इससे बचना चाहती है. इसके लिए वहां के आर्थिक सलाहकार ऐसे नायाब सलाह दे रहे हैं जिससे लोगों को अपने खान-पान सहित लग्जरी की कई चीजों में कटौती करनी पड़ सकती है।

कई आर्थ‍िक सलाहकारों ने सरकार को सलाह दी है कि देश में लग्जरी कारों, स्मार्टफोन और चीज के आयात पर रोक लगाई जाए. पाकिस्तान में नवगठित आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) ने ऐसे कई सुझाव दिए हैं जिससे आईएमएफ से फिर किसी राहत पैकेज को लेने से बचा जा सकता है।

पाकिस्तानी अखबार द न्यूज के अनुसार, पिछले हफ्ते वित्त मंत्री असद उमर की अध्यक्षता में हुई ईएसी की बैठक में यह सुझाव सामने आए हैं. असल में निर्यात घटने और आयात बढ़ने की वजह से पाक में डॉलर की कमी हो गई और वहां के रुपये पर दबाव बढ़ा है. विदेशी मुद्रा भंडार घटता जा रहा है. इसकी वजह से ज्यादातर वित्त विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान को फिर से आईएमएफ से राहत पैकेज के रूप में कर्ज लेना पड़ेगा. 1980 के दशक से अब तक पाकिस्तान आईएमएफ से 14 बार कर्ज ले चुका है।

पाकिस्तान की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और ईएसी के सदस्य अशफाक हसन खान ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया, ‘मीटिंग में कई अनूठे उपायों पर चर्चा हुई जिनसे आयात पर अंकुश लगाने पर मदद मिल सकती है. किसी भी सदस्य ने आईएमएफ के पास जाने का समर्थन नहीं किया. हमें कुछ न कुछ करना होगा, यह नहीं चलेगा कि हम कुछ नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए तत्काल करीब 9 अरब डॉलर के कर्ज की जरूरत है।

[कारों से लेकर फलों के आयात तक पर लग सकती है रोक]

जिन अनूठे उपायों की बात की गई उनमें एक साल के लिए चीज, कार, सेलफोन और फलों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगाने की बात है. इससे करीब 4 से 5 अरब डॉलर की बचत की जा सकती है. इसके साथ ही निर्यात बढ़ाकर 2 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा और बढ़ाने की उम्मीद है. अशफाक ने कहा, ‘आप देखिए कि पाकिस्तान में कितना ज्यादा चीज विदेश से आ रहा है. जिस देश में डॉलर न बचा हो, क्या वहां चीज के आयात की इजाजत देनी चाहिए।

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