पिछली सरकार के निर्णयों और कार्यों को बदलने का क्रम जारी कांग्रेस सरकार द्वारा

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जयपुर।  पिछली वसुंधरा सरकार के समय रिसर्जेंट राजस्थान  इनवेस्टमेंट समिट में विभिन्न कंपनियों के साथ किए गए एमओयू को गहलोत सरकार ने निरस्त करने की तैयारी कर ली है. इस समिट के दौरान कंपनियों के साथ सरकार ने 3.37 लाख करोड़ के एमओयू किए थे.  इसमें से 200 से ज्यादा एमओयू निरस्त किए जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि एमओयू साइन करने के बाद संबंधित कंपनियों की ओर से निवेश में रुची नहीं दिखाने पर ये कदम उठाया जा रहा है।

रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में 3.37 लाख करोड़ रुपए के 470 एमओयू किए थे. बताया जा रहा है कि कई बड़ी कंपनियों ने उस समय एमओयू तो साइन कर दिए. लेकिन, निवेश के मामले मे कोई रुचि नहीं दिखाई. इन कंपनियों को राज्य में पर्यटन, मेडिकल सहित तमाम क्षेत्र में निवेश करना था. इसके बदले सरकार की ओर से जमीन और  टेक्स  आदि में रियायत दिया जाना था. इस दौरान कई बड़ी कंपनियों के साथ भी लाखों करोड़ों रुपए एमओयू हुए थे. लेकिन, निवेश के मामले में इन कंपनियों ने उदासीन रवैया ही अपनाए रखा।

वहीं, इस मामले में उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया कि तीन साल के दौरान केवल 124 एमओयू पर ही काम शुरू हो पाया. जिससे केवल 12 हजार करोड़ का निवेश आया है. उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियां जिन्होंने एमओयू के बाद काम शुरू नहीं किया है, उन्हें पहले नोटिस दिए जाएंगे. इसके बाद भी कोई काम नहीं होता है तो एमओयू  रद्द किए जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि 470 एमओयू में से 154 पिछली सरकार के दौरान ही निरस्त माने जा चुके हैं. इन सभी के निवेशकों ने समिट के बाद कोई काम शुरू नहीं किया।

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