पूरब से फिर उगा कमल

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अगरतला/कोहिमा/शिलॉन्ग। पूर्व से सूर्य देव लालिमा के साथ उदित होकर लोगों में नए उत्साह का संचार करते हैं। ठीक इसी प्रकार कमल भी अपनी लाल आभा के साथ फिर पूरब से उदित हो गया है। कमल की आभा में ‘लाल किलाÓ ध्वस्त हो गया है। कमल की आभा ने त्रिपुरा में 25 वर्ष से सिंहासन पर काबिज लेफ्ट को राइट साइड कर दिया है और त्रिपुरावासियों में नई ऊर्जा को जन्म दे दिया है।

वहीं नगालैंड में भी भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी के साथ सत्ता पर काबिज हो जाएगी। इसे अब मोदी मैजिक कहें या कुछ और…लेकिन सयासी जगत में कभी उत्तर और पश्चिम भारत की पार्टी कही जाने वाली भाजपा ने सारे मिथकों और कयासों को धता बता दिया है। भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह पैन इंडिया यानी पूरे देश की पार्टी है। देश में २९ राज्यों में से 19 में अब भाजपा की सरकार उधर, मेघालय में 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए इस बार के चुनाव मनमाफिक परिणाम नहीं ला पाए। मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा दिखाई दे रही है।

केरल तक सिमटा लेफ्ट
बंगाली भाषी लोगों के इस राज्य में 1993 के बाद से ही सीपीएम की सरकार थी। लेकिन, पश्चिम बंगाल में दीदी यानी ममता बनर्जी और त्रिपुरा में भाजपा के चलते लेफ्ट को सत्ता छोडऩी पड़ी। अब केरल के अलावा वामपंथियों की सरकार कहीं नहीं बची है। कांग्रेस का तो यहां से सफाया ही हो गया है। पूर्वोत्तर के असम में पहली बार सरकार बनाने वाली भाजपा के बारे में यह आकलन किसी ने भी नहीं लगाया था कि वह त्रिपुरा में अभी अपना परचम लहराएगी। क्योंकि, वर्ष 2013 में भाजपा को सिर्फ 1.5 फीसदी वोट ही मिल पाए थे। वहीं 5 साल बाद ये तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब भाजपा को 50 फीसदी वोट मिले हैं और पार्टी यहां अपने बूते सरकार बनाएगी। त्रिपुरा में 2013 में 36.53 फीसदी वोट पाने वाली कांग्रेस को इस बार 2 फीसदी से भी कम वोट मिले हैं।

यह है समीकरण
मेघालय, त्रिपुरा और नगालैण्ड में 60 विधानसभा क्षेत्र हैं। लेकिन, मेघालय और त्रिपुरा में उम्मीदवारों के निधन के चलते 59 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव हो रहे हैं। वहीं नगालैण्ड में 60 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं।

मेघालय में कमाल दिखा सकता है कमल

मेघालय में अब तक आए चुनावी नतीजों को देखते हुए एनपीपी और दूसरे दल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। हालांकि, इन रुझानों में किसी भी एक दल को बहुमत मिलना मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में अभी से ही वहां सियासी उठापठक का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी, कांग्रेस और एनपीपी के नेताओं ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के अहम रणनीतिकार और सोनिया गांधी के भरोसेमंद अहमद पटेल दो अन्य बड़े नेताओं के साथ मेघालय पहुंच चुके हैं।

मेघालय में पिछले 10 साल से कांग्रेस की ही सरकार है। ऐसे में इस किले को बचाने के लिए कांग्रेस हरसंभव जतन कर रही है। वहीं, मेघालय में पहली बार कमल खिलाने की कोशिश कर रही भाजपा भी दबे पांव चाल चल रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा मेघालय में दिवंगत पीए संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) से बातचीत कर रही है। चर्चा है कि नतीजे साफ होने के बाद बीजेपी और एनपीपी हाथ मिला सकती हैं।

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