पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में बना नया इतिहास

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अजमेर।  सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में एक नया इतिहास बना है. कॉलेज की स्थापना के 181 साल बाद यहां पहली बार किसी महिला प्राचार्य की नियुक्ति हुई है. अंग्रेजों के जमाने में स्थापित हुए इस कॉलेज ने देश को ख्यातिनाम शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ, खेल और मनोरंजन के क्षेत्र में कई अनमोल हीरे दिए हैं.

वर्ष 1836 में स्थापित राजकीय महाविद्यालय, अजमेर उत्तर भारत का सबसे पुराना कॉलेज है. इसका इतिहास इतना समृद्ध है कि उसे शब्दों में समेटना काफी मुश्किल है. इस कॉलेज को देश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता है. यहां से निकले विद्यार्थियों ने देश विदेश में इस कॉलेज का नाम रोशन किया है. कॉलेज की स्थापना के बाद से ही यहां कभी महिला प्राचार्य नही रही. लेकिन बुधवार को डॉ. स्नेह सक्सेना ने इस कॉलेज के प्राचार्य पद को संभाल कर उस कमी को दूर करने के साथ ही एक नया इतिहास भी रच दिया. डॉ. सक्सेना इस कॉलेज में व्याख्याता के पद पर भी कार्यरत रही हैं. हाल ही में पुष्कर कॉलेज से ट्रांसर्फर होकर उन्होंने यहां ज्वाइन किया है.

गौरव और प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाना है
एतिहासिक महत्व वाले इस कॉलेज में पहली महिला प्राचार्य के रूप में पदभार संभालने के बाद डॉ. सक्सेना थोड़ी भावुक जरुर हुईं, लेकिन सरकार की ओर से मिली बड़ी जिम्मेदारी को मजबूती के साथ निभाने के लिए संकल्पित भी दिखी.

डॉ. सक्सेना ने कहा कि कॉलेज में टीम वर्क के रूप मे काम करते हुए इसके गौरव और प्रतिष्ठा को और आगे बढ़ाना ही उनकी प्राथमिकता रहेगी. सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित इस कॉलेज को पहले से ही ‘ए प्लस’ मान्यता मिली हुई है.

ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी इसकी स्थापना
ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसकी स्थापना साल 1836 में इंग्लिश स्कूल के रूप में की थी. बाद में 1868 में इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में शुरू हुआ. साल 1896 में यहां कला संकाय शुरू हुआ और 1913 से विज्ञान संकाय. यह प्रदेश का पहला कॉलेज था जहां विज्ञान विषय में पोस्ट ग्रेज्युएशन कोर्सेस शुरू हुए थे. यह कॉलेज सबसे पहले कोलकाता विश्वविद्यालय से संबद्धता रखता था. फिर इलाहाबाद से होता हुआ आगरा और बाद में राजस्थान विश्वविद्यालय से जुडा. साल 1987 में जब महर्षि दयानन्द सरस्वती का गठन हुआ तब से यह अजमेर विश्वविद्दालय से संबद्ध रख रहा है.

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