प्रतिभागी सीख रहे स्क्रीन प्ले राइटिंग

महानगर संवाददाता
जयपुर। फिल्म मेकिंग और इससे जुड़े अनेक अन्य क्षेत्रों में रुचि जगाने के लिए जवाहर कला केंद्र में स्क्रीनप्ले राइटिंग और फिल्म एप्रेशिएशन कोर्सेज की शुरुआत हुई। ये कोर्सेज फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के सहयोग से आयोजित किए जा रहे हैं। फिल्म मेकिंग के शौकीन लोगों को सीखने के लिए मंच प्रदान करना और उन्हें इन क्षेत्रों में आगे बढ़ाना इन कोर्सेज के उद्देश्य हैं। राजस्थान, उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र एवं गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के 24 प्रतिभागियों द्वारा इस कोर्स के लिए पंजीकरण कराया गया है। स्क्रीन प्ले राइटिंग की आधारभूत जानकारी दिए जाने के साथ इस कोर्स की शुरुआत हुई। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने बताया कि किन कारणों ने उन्हें स्क्रीन प्ले राइटिंग के लिए प्रेरित किया। वर्कशॉप के दौरान गिर्नी, आफ्टर ब्लू तथा शुब्रकाहित्री (मराठी) फिल्में दिखाई गई, जिसके बाद स्क्रिप्ट को समझने के लिए कोर्स के प्रशिक्षक एफटीआईआई के अरुणाराजे पाटिल और सौमिल शुक्ला के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों द्वारा फिल्मों का समीक्षात्मक विश्लेषण किया गया।
इस कोर्स के आगामी चार सप्ताह के दौरान स्टोरी टेलिंग की मौलिक जानकारी एवं इसकी संरचना की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्स की गतिविधियों में उन कहानियों का नरेशन और लघु प्रस्तुति भी शामिल होगी, जो प्रतिभागियों द्वारा बचपन में सुनी गई थी। कोर्स के दौरान प्राप्त की गई प्रशिक्षण के आधार पर सभी विद्यार्थियों द्वारा दो पेज की स्टोरीलाइन भी लिखी जाएगी और कहानी के किसी पात्र का स्केच भी तैयार किया जाएगा।
फिल्म एप्रेशिएशन के 10 दिवसीय इस कोर्स के लिए राजस्थान, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, उड़ीसा, केरल और उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के करीब 85 प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण कराया गया है। कोर्स के प्रथम दिन एफटीआईआई की फैकल्टी जीवी सिंह ने प्रतिभागियों को कोर्स की जानकारी दी। उन्होंने एफटीआईआई के कोर्सेज और फिल्म मेकिंग के अवसरों के बारे में बताया। इसके बाद सुमन और भर दो पहल जैसी फिल्मों की स्क्रीनिंग कर इनकी समीक्षा की गई।
कोर्स के आगामी दिनों में इसके प्रशिक्षक पंकज सक्सेना व मुनीश भारद्वाज द्वारा मूक फिल्मों से लेकर वर्तमान युग की कुछ और फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इससे कोर्स के विद्यार्थियों में फिल्मों को बारीकी से देखने और समीक्षा करने का कौशल विकसित हो सकेगा। इसके साथ ही उन्हें दुनिया एवं भारत में फिल्में बनाने के इतिहास के बारे में भी सीखने को मिलेगा।

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