फिल्म बंबलबी रिव्यु- एक दशक में सर्वश्रेष्ठ ट्रांसफॉर्मर फिल्म

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फिल्म – बंबलबी

कलाकार – हैनी स्टीनफेल्ड, जॉन सीना, जे लेंडेबॉर्ग जूनियर, जॉन ऑर्टिज, जैसन ड्रकर और पामेला एडलॉन
निर्देशक – ट्रैविस नाइट
रेटिंग – ***

किसी दमदार आइडिया का जब अपने ही हाथों तियापांचा होते दिखने लगे तो क्या करना चाहिए, इसका जवाब है मशहूर निर्माता निर्देशक माइकल बे की फिल्म बंबलबी। धूम, कृष, हेट स्टोरी, जन्नत, राज जैसी सीरीज बनाने वाले हिंदी फिल्म निर्माताओं के अलावा इन सीरीज के प्रशंसक रहे हिंदी सिनेमा के दर्शकों को भी ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए। बंबल बी दरअसल ट्रॉन्सफॉर्मर्स सीरीज के पहले की कहानी है।

ये सीरीज बहुत ही शानदार तरीके से शुरू हो तो हुई लेकिन इसकी पिछली कड़ी तक आते आते माइकल बे इस बात की समझ खो बैठे कि इस शानदार आइडिया को कैसे लोकप्रिय बनाए रखा जाए। बेमतलब के एक्शन, तबाही का मंजर और कानफाड़ू बैकग्राउंड म्यूजिक इस सीरीज को डुबो रहा था और तभी माइकल बे ने फैसला किया किसी दूसरे निर्देशक को इसकी अगली फिल्म की कमान सौंपने का। नतीजा है बंबलबी। एक ऐसी कहानी जो आपको रोमांचित भी करती है और रूलाती भी है।

स्टीवन स्पीलबर्ग की 1982 में रिलीज हुई ईटी (ऋतिक की फिल्म कोई मिल गया का जादू यहीं से लिया गया है) के दौर में सेट की गई बंबलबी की कहानी एक टीनएजर लड़की और एक रोबोट की दोस्ती की कहानी है। गैलेक्सी के एक ग्रह पर मशीनों की जंग चल रही है। ऑटोबॉट्स को हारता देख उनका मुखिया ऑप्टिमस प्राइम अपनी टोली के बी 127 को धरती पर भेज देता है ताकि वह वहां जाकर उनके भविष्य की जमीन तैयार कर लके।

बी धरती पर आता है तो आते ही उसे एजेंट बर्न्स के जवानों के हमले का सामना करना होता है। यहीं उस पर एक और हमला भी होता है और वह याददाश्त खो बैठता है। बीटल कार में खुद को बदल चुके बी की मुलाकात होती है चार्ली से जिसकी दुनिया में एक मां है जो दूसरी शादी कर चुकी है और हैं वो सारी परेशानियां जो 18 साल की हो रही एक लड़की के साथ होती हैं। और, यहीं से शुरू होता है दो थके हारे, लुटे पिटे और अपनी अपनी जिंदगी से परेशान दो लोगों का रिश्ता जो आखिर तक आते आते दर्शकों को जिंदगी जीने के तमाम नए सबक दे जाता है।

दो घंटे से कुछ ही कम अवधि की इस फिल्म को निर्देशक ट्रैविस नाइट ने शुरू से आखिर तक इंसानी जज्बात के दायरे में बांधे रखा है। यही वह सबसे अहम बात थी जो ट्रॉन्सफॉर्मस सीरीज से गायब होती जा रही थी। नाइट ने सीरीज की कमजोर कड़ी समझी और इसे न सिर्फ दूर किया बल्कि एक मैकेनिकल कहानी को पूरी तरह से इमोशनल बॉन्डिंग में तब्दील कर दिया।

यहां आपको दिमाग घर पर छोड़कर आने की जरूरत नहीं है। बंबलबी का अकेले ही चार्ली की घर में चहलकदमी करने वाला सीन हो या फिर चार्ली और बंबलबी के साथ के सीन, ट्रेविस नाइट ने हर बार कमाल का काम किया है। नाइन ने अपनी पिछली फिल्मों कूबो और टू स्ट्रिंग्स का अनुभव भी स्पेशल इफेक्ट्स से भरपूर बंबली भी बखूबी इस्तेमाल करने में कामबायी पाई है।

अदाकारी के लिहाज चार्ली का किरदार कर रहीं हैली स्टैनफील्ड फिल्म की जान हैं। एक टूटे हुए परिवार में बड़ी हुई किशोरवय युवती के रूप में हैली ने अपने भीतर के अवसाद, आजादी की चाहत और दोस्ती की दिक्कतों को पदे पर जीवंत किया है। फिल्म में जॉन सीना भी हैं। भारत में उनके लाखों प्रशंसक हैं और इस लिहाज से बंबलबी के लिए वह काफी मददगार साबित हुए हैं।

पिछले साल के आखिर में अगर आप जीरो के स्पेशल इफेक्ट्स के बीच झूलती  कहानी या फिर तूफानी स्टंट्स के बीच रणवीर सिंह की फिल्म सिम्बा।  बंबलबी आपके लिए फुल फैमिली एंटरटेनर है।।

खुशी से झूमे रणवीर सिंह के फैंस, कहा ‘अरे अपना सिम्बा तो रैप भी करता है…’

 

 

 

 

 

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