बालाजी दर्शन के लिए भक्तों और पर्यटकों का लगा तांता

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यहां पर लगी लम्बी कतारों में पर्यटकों सहित परीक्षार्थियों को गंतव्य स्थान पर जाने के लिए आरक्षण करवाने को लेकर भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. जहां सैकडो़ं की संख्या में छात्र कतारों मे लगे हुए निरीक्षण करवाने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं सुरक्षा को लेकर RPF जवानों को भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. कई बार तो छात्रों ने हुडदंग भी कर दिया. मौके पर मौजूद जवानों ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सम्भाल लिया।
बता दें कि भले ही रेल प्रशासन बांदीकुई को हैरिटेज स्टेशन बनाने का सपना संजोए हुए है. लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते प्लेटफार्म नम्बर 6 के बाहर बनी अस्थायी आरक्षण विंडो पर सुविधाओं का अभाव सहित पीने के पानी का अभाव है, जिससे परीक्षार्थियों और यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बांदीकुई में यदि किसी यात्री को अलवर या दौसा के लिए यात्रा करनी है तो उसे बसवा रोड कोर्ट तिराहा या फिर बायपास पहुंचना होगा. इसका कारण अधिकांश रोडवेज बसें बायपास होकर गुजर जाती हैं. ऐसे में यात्री सिकंदरा रोड मुख्य बस स्टैण्ड पर बसों का इंतजार करते रह जाते हैं. लेकिन डिपो प्रशासन का बसों को मुख्य बस स्टैण्ड होकर गुजारने की ओर कोई ध्यान नहीं है।
जानकारी के मुताबिक अलवर-सिकंदरा सड़क मार्ग पर करीब 60 से अधिक बसें संचालित हैं. इनमें से मात्र 20 फीसदी बसें ही सिकंदरा रोड बस स्टैण्ड से होकर गुजरती हैं. जबकि शेष बसें सीधे बायपास होकर बसवा रोड कोर्ट तिराहे से होकर गुजर जाती हैं. जबकि सिकंदरा रोड बस स्टैण्ड रेलवे स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार के सामने स्थित है. ऐसे में यात्रीभार भी बहुत अधिक है. लेकिन इसके बाद भी बसों का बस स्टैण्ड नहीं आना अलवर आगार की डिपो की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है. खास बात यह है कि इस बस स्टैण्ड पर करीब साढ़े तीन साल से टिकट बाबू तक नहीं है।
बस चालक शहर में लगने वाले जाम से बचने के लिए ही बसों को बायपास होकर ले जाते हैं. ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को रेलवे स्टेशन आना है तो उसे करीब दो कि लोमीटर दूरी पैदल तय करनी पड़ती है. ऐसे में मजबूरन यात्रियों को जान जोखिम में डालकर निजी वाहनों में यात्रा करनी पड़ रही है. ज्यादा परेशानी मेहंदीपुर बालाजी आवाजाही करने वाले यात्रियों को होती है. इससे  प्रतिदिन हजारों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है. सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन 30 से 35 हजार की आय होती थी, जो कि अब घटकर 10 से 12 हजार रह गई है

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