ब्रेक्सिट: खौफ में किसान…यूरोपीय संघ के श्रमिक जाने से खेतों में सड़ जाएंगी फसलें

लंदन। मौसमी श्रमिकों के लिए ब्रेक्सिट वीजा योजना घोषित नहीं होने के चलते ब्रिटिश किसान और उत्पादक परेशान हैं। इसके चलते उनकी फसल खेतों में ही पड़ी-पड़ी सड़ रही है। किसानों के लिए यह स्थिति ऐसी है मानो ‘उनके शरीर में प्राण ही’ ना बचे हों। इन मौसमी सब्जी और फल उत्पादकों ने ब्रिटेन की सेना के कुछ हिस्सों में नौकरियों की तलाश शुरू कर दी है। ताकि वे यह आश्वासन पा सकें कि बेक्सिट के बाद भी उनका स्वागत किया जाएगा।

पूर्वी यूरोप की भागीदारी सिर्फ 0.6 फीसदी

ब्रिटिश में फसलों की कटाई करने वाले 85,000 कुल श्रमिकों में से पूर्वी यूरोप की भागीदारी सिर्फ 0.6 फीसदी है।

रोमन लोग, बुल्गारिया सहित अन्य पूर्वी यूरोपीय लोग जो ब्रिटेन में टैक्स चुकाते हैं।

ये लोग यहां से ब्रिटिश उपज को इनके बाजारों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।

30 फीसदी मौसमी श्रमिक हुए बेरोजगार

एक साल के बाद अब ब्रिटिश किसान और उत्पादक बेक्सिट के बाद फिर से

वीजा योजना शुरू करने के लिए गृहमंत्रालय में फोन कर रहे हैं।

नेशनल किसान संघ (एनएफयू) के आंकड़ों के मुताबिक करीब 30 फीसदी मौसमी श्रमिक कम हो गए हैं।

किसानों को भी सुरक्षा की दरकार

हेरफोर्डशायर स्थित वाई वैली में फसल प्रबंधक एलीना कोस्टाडिनोवा ने कहा कि किसानों के भी परिवार हैं।

उन्हें भी संसाधन और सुरक्षा उपलब्ध कराने की जरूरत है।

पिछले कई सालों में हमने कई लोगों को खो दिया है। वे यूरोपीय संघ के अन्य देशों में चले गए हैं।

व्यापार जगत हो जाएगा बेपटरी

किसान क्रिस चिन्न का कहना है कि वह यथार्थवादी है और ब्रेक्सिट रिमूनेर नहीं है।

कुल मिलाकर उनका व्यवसाय करीब 1,000 मौसमी श्रमिकों को रोजगार देता है।

इन श्रमिकों ने इस वर्ष जिन्दगी जीने के लिए संघर्ष किया।

पहले मौसम के चलते दो बार इन्हें फसलों को खेतों में छोडऩा पड़ा।

उन्होंने कहा कि बिना श्रमिकों के हम फसल पैदा नहीं कर सकते हैं।

इससे व्यापार जगत बेपटरी हो जाएगा।

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