भाजपा की प्रवक्ता मिस्फिका हसन अचानक से कहां गायब हो गई

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20 सितंबर के बाद प्रवक्ता मिस्फिका न तो पार्टी के किसी कार्यक्रम में विशेष रूप से सक्रिय दिखीं और न ही वह प्रवक्ता की हैसियत से मीडिया में अपना वक्तव्य रखती हुई दिखीं. मिस्फिका के साथ राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अनिल सिन्हा को भी प्रवक्ता बनाया गया था।
मिस्फिका को लेकर अब पार्टी के कार्यकर्ताओं के अंदर भी कानाफूसी का दौर चलना शुरू हो गया है. जिन्हें नहीं मालूम उन कार्यकर्ताओं के जहन में एक ही सवाल है कि आखिर अचानक पार्टी में अर्स पर पहुंची मिस्फिका आखिर कहां गायब हो गई. हालांकि इस मुद्दे पर पार्टी के बड़े नेता खुलकर कुछ नहीं बोलते और उनकी यही चुप्पी कार्यकर्ताओं को और परेशान कर देती है।
दरअसल, मिस्फिका पार्टी में प्रवक्ता बनने से पहले ही पार्टी के अंदर चर्चा का केंद्र बिंदु बनी हुई थी. चाहे प्रधानमंत्री से मुलाकात का मामला हो या फिर उन्हें बॉडीगार्ड मुहैया कराने का मसला हो. वह पहली बार साहिबगंज में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में दिखी थी, जिसके बाद से चर्चा में बनी हुई थी. अब जब मिस्फिका लंबे समय से राजनीतिक पर्दे से बाहर है तो कार्यकर्ता दबी जुबान सवाल पूछ रहे हैं कि अचनाक जो बीजेपी उनको इतनी तवज्जो दे रही थी उसने उन्हें कहां गायब कर दिया।
गौरतलब है कि 2015 में पाकुड़ जिले के इलमी पंचायत की मुखिया मिस्फिका जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी से बायोटेक की डिग्री हासिल की है और एम्स कैंसर पर रिसर्च कर रही थी. बाद में उसने गांव की तस्वीर बदलने की मकसद से मुखिया का चुनाव लड़ा था।

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