भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, जमीनी हकीकत कुछ और ही

चौमूं। चोरी और फिर सीना जोरी वाली कहावत तो आपने सुनी होगी। ये कहावत एक ऐसे निजी अस्‍पताल पर सटीक बैठती जो सरकार को चूना लगा रहा और
इसकी शिकायत करने पर यहां के कर्मचारी दादागिरी पर उतर आते हैं।

जनता को राहत देने के लिए सरकार कई योजनाओं का संचालन करती है

लेकिन इन योजनाओं के लागू होने के बाद जमीनी हकिकत कुछ और ही नजर आती है।

गरीब असहाय लोगों को राहत देने के लिए भाजपा सरकार ने भामाशाह स्‍वास्‍थ्य बीमा योजना लागू की थी। इस

योजना की हकीकत जानी जाए तो योजना के जरिए प्रदेश के गरीब तबके के लोगों को राहत भी मिली है।

लेकिन कुछ निजी अस्‍पताल ऐसे भी जो अपनी जेबो को भरने में लगे हैं।

राजधानी जयपुर से 30 किमी दूर चौमूं कस्‍बे में मरीज के पास भामाशाह कार्ड होने के बाद भी

ऑपरेशन के नाम पर चौमूं के टोकस अस्‍पताल प्रबंधन ने रूपए ऐंठ लिए। इतना ही

नहीं जब पीड़ित ने इसकी शिकायत जिला कलक्‍टर से की तो अस्‍पताल

प्रबंधन ने अपने गुण्‍डों से शिकायतकर्ता पर जानलेवा हमला किया। इस हमले में शिकायतकर्ता के पैर टूट गए।

हालाकिं जिला कलक्‍टर ने मामले को गम्‍भीरता से लिया और टोकस

अस्‍पताल को भामाशाह योजना से हटवा दिया। आपको बता दें कि सामोद निवासी राजुमनोहर ने टोकस असपताल में अपनी मां के पेट की बीमारी के लिए ऑपरेशन करवाया था।

पेशे से जीप की ड्राइवरी करने वाले राजुमनोहर के पास अस्‍पताल प्रबंधन को देने के लिए

मोटी रकम नहीं थी तो भामाशाह कार्ड उसके लिए संजीवनी बन गया और मां का ऑपरेशन करवा लिया।

अस्‍पताल के चिकित्‍सक ने राजुमनोहर से सरकार के रूपए पास नहीं होने की बात कही और उससे

4 हजार रूपये ले लिए। इसके बाद राजुमनोहर ने भामाशाह हैल्‍पलाइन

नम्‍बर पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने

राजुमनोहर को पैसे लोटाने के बहाने बुलाया और मारपीट कर दी। जिससे राजुमनोहर के पैर टूट गए।

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